हाईकोर्ट की सख्ती का असर: 8 किसानों के नाम दर्ज हुई जमीन
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राजस्व विभाग में बड़ी कार्रवाई हुई है। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और हाईकोर्ट के आदेशों का वर्षों तक पालन नहीं किए जाने पर राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को अदालत में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। वहीं टीकमगढ़ जिले के दो राजस्व अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और आखिरकार आठ किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए।
जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पहले प्रमुख सचिव को तलब किया था ताकि उन्हें अधीनस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया जा सके। सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट होने के बाद अदालत ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।
2021 के आदेश के बाद भी नहीं दर्ज हुए थे किसानों के नाम
अवमानना याचिका टीकमगढ़ जिले की लिधौरा तहसील के ग्राम गोटेटखास निवासी राकेश यादव सहित आठ किसानों ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए आदेश के बावजूद उनके नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं किए जा रहे थे।
दो अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में लापरवाही बरतने वाले नायब तहसीलदार शिब्बू सिंह कसोरिया और एसडीओ (राजस्व) संजय दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ गुलाटी एवं अधिवक्ता भानु प्रताप यादव ने पक्ष रखा।
कलेक्टर को जांच के निर्देश
अदालत में प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार का पत्र भी प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि टीकमगढ़ कलेक्टर को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में दो वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों की समिति गठित की गई है, जो हाईकोर्ट के आदेशों के पालन में हुई लापरवाही की जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की समाप्त
आठ किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने, दोषी अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच शुरू होने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आदेश का पालन हो चुका है। इसके बाद अदालत ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।


