जबलपुर। नगर निगम एक ओर स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को देश में नंबर-1 बनाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में नालियों की सफाई तो कर दी गई, लेकिन उनसे निकाली गई सिल्ट कई दिनों तक सड़कों पर ही छोड़ दी गई है।
विक्टोरिया हॉस्पिटल रोड, भंवरताल गार्डन और मालवीय चौक जैसे व्यस्त क्षेत्रों में बारिश के बीच सड़क किनारे फैली सिल्ट लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बारिश होने पर यही सिल्ट कीचड़ में बदल जाती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गंदगी और दुर्गंध के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक सड़क पर कचरा फेंक दे तो नगर निगम का अमला तुरंत चालान काटने पहुंच जाता है, लेकिन नालियों से निकाली गई सिल्ट को समय पर हटाने की जिम्मेदारी तय नहीं होती। ऐसा प्रतीत होता है कि न तो सिल्ट उठाने का कोई निश्चित समय निर्धारित है और न ही इसकी निगरानी के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय है।
स्वच्छता केवल नालियों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि निकाले गए कचरे और सिल्ट का समय पर उचित निस्तारण भी उतना ही आवश्यक है। यदि नगर निगम वास्तव में जबलपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर-1 बनाना चाहता है, तो उसे सफाई व्यवस्था के साथ-साथ उसके प्रभावी प्रबंधन और जवाबदेही पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


