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October 4, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग की दस्तक, मार्मोट का मांस खाने से हुआ संक्रमण



उलानबटार, 25 जुलाई (। मंगोलिया के पश्चिमी खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक संदिग्ध मामले की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (एनसीजेडडी) ने शुक्रवार को बताया कि अंतिम बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई।


एनसीजेडडी के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति को पड़ोसी बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र की यात्रा के दौरान मार्मोट (एक प्रकार की जंगली गिलहरी) का मांस खाने के बाद संक्रमण हुआ।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से मार्मोट का शिकार न करने, उसका मांस या आंतरिक अंग न छूने और मृत या बीमार जंगली कृंतकों के संपर्क से बचने की अपील की है। केंद्र ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों से संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।

हालांकि मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी प्रतिबंध है, लेकिन कुछ लोग अब भी इसे स्वादिष्ट भोजन मानते हैं, जिसके कारण अवैध शिकार जारी है।

एनसीजेडडी के अनुसार, गर्मियों के महीनों में प्लेग फैलने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग ग्रामीण इलाकों की यात्रा करते हैं और कुछ लोग मार्मोट का मांस भी खाते हैं। पिछले वर्षों में भी इसी अवधि के दौरान मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ मरीजों की मौत भी हुई थी।

केंद्र ने बताया कि मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत वर्तमान में प्लेग प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की श्रेणी में हैं।

पिछले वर्ष सितंबर में देश में ब्यूबोनिक प्लेग के तीन मामलों की पुष्टि हुई थी, जिनमें से दो खुव्सगुल प्रांत के थे। सभी मरीजों का उपचार खुव्सगुल प्रांतीय जनरल अस्पताल में किया गया था। संक्रमितों के संपर्क में आए 80 लोगों को पृथक (आइसोलेट) कर स्थानीय अस्पतालों में इलाज दिया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग एक जीवाणुजनित (बैक्टीरियल) बीमारी है, जो जंगली कृंतकों, विशेषकर मार्मोट जैसे जानवरों पर रहने वाले पिस्सुओं के माध्यम से फैलती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी 24 घंटे के भीतर जानलेवा साबित हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इतिहास में प्लेग ने कई बड़ी महामारियों को जन्म दिया, जिनमें 14वीं शताब्दी की ‘ब्लैक डेथ’ भी शामिल है, जिससे यूरोप में 5 करोड़ से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हालांकि आज एंटीबायोटिक दवाओं और सामान्य सावधानियों की मदद से इस बीमारी का प्रभावी इलाज संभव है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, प्लेग ओशिनिया को छोड़कर सभी महाद्वीपों में पाया जाता है। 1990 के दशक के बाद से इसके अधिकांश मानव मामले अफ्रीका में दर्ज किए गए हैं। वर्तमान में डीआरसी, मेडागास्कर और पेरू इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं।

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