जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए छिंदवाड़ा में पदस्थ कार्यपालन अभियंता शरद बिसेन का तबादला कर दिया है। उन पर ठेकेदारों से बिलों के भुगतान के बदले कथित रूप से अवैध धनराशि मांगने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। कंपनी प्रबंधन ने उन्हें छिंदवाड़ा से हटाकर छतरपुर में कार्यपालन अभियंता (प्रवर्तन) के पद पर पदस्थ किया है।
कंपनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को किए गए इस स्थानांतरण के साथ ही शरद बिसेन के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। मामले में औपचारिक आरोप पत्र जारी कर उनसे आरोपों पर जवाब मांगा गया है।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई
बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। प्रबंधन का कहना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन या भ्रष्ट आचरण पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदारों से अवैध वसूली के आरोप
शरद बिसेन पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों से बिलों के भुगतान के बदले कथित रूप से अवैध राशि की मांग की। शिकायतों के आधार पर कंपनी ने प्राथमिक स्तर पर मामला गंभीर मानते हुए पहले उनका तबादला किया और फिर विभागीय जांच प्रारंभ कर दी।
निष्पक्ष जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि विभागीय जांच निष्पक्ष और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। जांच में आरोप सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कंपनी ने यह भी दोहराया है कि संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उपभोक्ताओं और हितधारकों का विश्वास बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।


