जबलपुर। बीते 20 जुलाई को हुए जिला अधिवक्ता
संघ जबलपुर के चुनाव में कथित गड़बड़ियों और
अनियमितताओं को लेकर अधिवक्ता अभिषेक
श्रीवास्तव द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर
में दायर रिट याचिका पर न्यायमूर्ति विवेक
अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए चुनाव से
जुड़े सभी अहम साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखने
के कड़े निर्देश दिए हैं। यूअदालत ने तदर्थ समिति को
साफ कहा है कि मतदान में उपयोग किए गए
मतपत्रों, जिला न्यायालय परिसर के सभी
सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और निर्वाचन स्थल के
आस-पास के कैमरों की रिकॉर्डिंग को संभाल कर
रखा जाए ताकि कोई भी सबूत नष्ट न हो सके।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए
न्यायालय ने तीन वरिष्ठ जजों की एक विशेष जांच
कमेटी का गठन भी किया है जो पूरी निष्पक्षता से
जांच करके अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी। हालांकि
अभी कमेटी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई
है। याचिकाकर्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने अपना पक्ष
खुद रखा और उनके साथ अधिवक्ता मंगेश
ताम्हणकर, सौरभ शुक्ला, तीर्थेश भारिल्य, सुबोध
पृथु त्रिपाठी, दीपांशु दुबे और देवेंद्र उड्डे भी न्यायालय
में मौजूद रहे।
डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने सख्त निर्देश
अदालत ने तदर्थ समिति को यह सुनिश्चित करने के
लिए कहा है कि निर्वाचन से जुड़ा एक भी दस्तावेज
या डिजिटल सबूत बाहर न जाए और न ही उसमें
किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जाए। जिला
न्यायालय परिसर के कोने-कोने में लगे कैमरों
की रिकॉर्डिंग को सील करने की प्रक्रिया से चुनाव
के दिन की गतिविधियों का पूरा सच सामने आने
की उम्मीद है। मतपत्रों की सुरक्षा को लेकर दिए गए
इन निर्देशों से उन तमाम आशंकाओं पर विराम
लगाने की कोशिश की जा रही है जो चुनाव
परिणामों के बाद से वकीलों के बीच चर्चा का विषय
बनी हुई थीं। इस अंतरिम आदेश के बाद से चुनाव
समिति से जुड़े लोगों की जिम्मेदारियां काफी बढ़
गई हैं क्योंकि अब उन्हें हर एक सबूत को अदालत
के समक्ष सुरक्षित पेश करना होगा।
जांच रिपोर्ट तय करेगी आगे की दिशा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश उच्च
न्यायालय ने तीन वरिष्ठ जजों की एक उच्चस्तरीय
जांच समिति का गठन कर दिया है जो पूरे
घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल करेगी। यह
समिति चुनाव के दौरान आई शिकायतों, मतदान
प्रक्रिया और अन्य अनियमितताओं के हर एक
पहलू की गहराई से जांच करेगी। जांच का यह
स्वतंत्र दायरा यह सुनिश्चित करेगा कि रिपोर्ट पूरी
तरह निष्पक्ष हो और किसी भी पक्ष का दबाव इस
पर हावी न हो सके। वकीलों के समुदाय में इस बात
को लेकर संतोष है कि उच्च न्यायालय ने खुद
संज्ञान लेते हुए एक मजबूत जांच तंत्र स्थापित
किया है। समिति की यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि
आगामी समय में जिला अधिवक्ता संघ के चुनावों
की रुपरेखा और दिशा क्या रहने वाली है।


