August 8, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

रियल-टाइम ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी से कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद: डॉ. श्याम अग्रवाल



नई दिल्ली, 8 अगस्त  नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि रियल-टाइम ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद कर सकती हैं कि कोशिकाएं संभावित दवाओं पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।

उन्होंने कहा कि इससे सूक्ष्म बायोकेमिकल बदलावों का पता लगाने में तेजी आ सकती है और प्री-क्लिनिकल रिसर्च के दौरान असरदार इलाज के तरीकों की बेहतर पहचान हो सकती है।

अग्रवाल ने कहा, “कॉम्प्रिहेंसिव जीनोम प्रोफाइलिंग (सीजीपी) और मिनिमल रेसिडुअल डिजीज डिटेक्शन (एमआरडी) के साथ प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी को समझने से डॉक्टरों को कैंसर के मरीजों के लिए टारगेटेड पर्सनलाइज्ड मेडिसिन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।”

भारतीय मूल की बायोटेक उद्यमी परमिता मिश्रा, जो सैन फ्रांसिस्को स्थित ‘प्रिसिजेनेटिक्स’ की संस्थापक और सीईओ हैं और जीवित कोशिकाओं से रियल-टाइम बायोकेमिकल जानकारी हासिल करने वाला प्लेटफॉर्म चलाती हैं, ने कहा, “जब शोधकर्ता जैविक ‘ऑटोप्सी’ पर निर्भर रहने के बजाय लगातार यह मापते हैं कि कोशिकाएं कैसा व्यवहार करती हैं, तो उन्हें ऐसी जानकारी मिल सकती है जिसे पहले देखना असंभव था।”

मिश्रा ने कहा, “इसके असर कैंसर से कहीं आगे तक जाते हैं, जिसमें इम्यूनोलॉजी, न्यूरोसाइंस, दुर्लभ बीमारियां और रीजेनरेटिव मेडिसिन शामिल हैं।”

बयान में कहा गया है, “पारंपरिक प्रयोगशाला तकनीकों के विपरीत, जिनमें अक्सर विश्लेषण से पहले कोशिकाओं को स्टेन करने, फिक्स करने या तोड़ने की जरूरत होती है, यह प्लेटफॉर्म जीवित बायोलॉजी की लगातार निगरानी करता है। इससे वैज्ञानिक अलग-थलग एंड-पॉइंट माप पर निर्भर रहने के बजाय समय के साथ सेलुलर व्यवहार का अध्ययन कर सकते हैं।”

कैंसर की दवा का विकास फार्मास्युटिकल रिसर्च के सबसे मुश्किल क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। इंडस्ट्री की स्टडीज से लगातार पता चला है कि क्लिनिकल डेवलपमेंट में आने वाली ऑन्कोलॉजी दवाओं की ज्यादातर संभावित दवाएं मरीजों तक पहुंचने से पहले ही फेल हो जाती हैं।

वैज्ञानिक अक्सर कई विफलताओं का कारण मौजूदा प्रयोगशाला मॉडलों की उस अक्षमता को मानते हैं, जिसके कारण वे जीवित कोशिकाओं की जटिलता और गतिशील व्यवहार को पूरी तरह से नहीं समझ पाते हैं।

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में भारत में कैंसर के अनुमानित 1.4 मिलियन नए मामले सामने आए।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दशक में देश में कैंसर का बोझ बढ़ता रहेगा।

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