_सालई-बरेलीपार मार्ग बंद होने से किसानों की बढ़ी परेशानी, जनप्रतिनिधियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी_
कुरई। जिले के कुरई विकासखंड अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले आदिवासी बाहुल्य ग्राम सालई से बरेलीपार के वर्षों पुराने मार्ग को वन विभाग द्वारा बंद किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के इस रास्ते को बंद कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। मार्ग बंद होने को लेकर ग्रामीणों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक यह मार्ग वर्षों से उनके दैनिक आवागमन, खेती-किसानी और कृषि कार्यों के लिए प्रमुख रास्ता रहा है। क्षेत्र के कई किसानों की कृषि भूमि भी इसी मार्ग से जुड़ी हुई है। रास्ता बंद होने के कारण किसानों के लिए अपने खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अचानक रास्ता बंद किए जाने से उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
*घाटकोहका और बादलपार जाने का भी प्रमुख मार्ग*
बरेलीपार के ग्रामीणों के अनुसार घाटकोहका और बादलपार की ओर आने-जाने के लिए भी इसी मार्ग का लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है। अब रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इसका सीधा असर खेती-किसानी, मजदूरी और रोजमर्रा के जरूरी कार्यों पर पड़ने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है।
*बोले ग्रामीण—हम सीधे-साधे आदिवासी, आए दिन किया जाता है परेशान*
ग्रामीणों का कहना है कि “हम यहां सीधे-साधे, भोले-भाले आदिवासी लोग निवासरत हैं। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा आए दिन किसी न किसी बात को लेकर हमें परेशान किया जाता है। वर्षों से जिस रास्ते का उपयोग हम अपने आने-जाने और खेती-किसानी के लिए करते आ रहे हैं, उसे भी बिना पूर्व सूचना के बंद कर दिया गया। ऐसे में आखिर हम ग्रामीण कहां से आएंगे और कहां जाएंगे?”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि वन विभाग को किसी कारणवश मार्ग बंद करना जरूरी था तो पहले स्थानीय लोगों, वन समिति और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी। साथ ही ग्रामीणों के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
*वन समिति अध्यक्ष से भी नहीं किया गया विचार-विमर्श*
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा वन विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। जनपद सदस्य कैलाश उईके ने कहा कि वन समिति अध्यक्ष सहित किसी से भी विचार-विमर्श नहीं किया गया और ग्रामीणों के आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों का आवागमन इसी मार्ग से होता है। यदि ग्रामीणों की बात नहीं मानी गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही वन विभाग की होगी।
वहीं जनपद सदस्य सविता करवेती ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्र की जनता और किसानों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने वन विभाग से शांतिपूर्ण एवं विनम्र तरीके से आग्रह करते हुए कहा कि क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों को उनके पुराने रास्ते से आवागमन की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण निवेदन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
*मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि, ग्रामीणों में दिखा आक्रोश*
इस दौरान विजयपानी सरपंच निरंजन धुर्वे सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे। मार्ग बंद किए जाने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी दिखाई दी। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि वर्षों से उपयोग में आ रहे इस मार्ग को लेकर तत्काल उचित निर्णय लिया जाए और किसानों एवं ग्रामीणों के आवागमन की समस्या का समाधान किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि उनकी खेती, रोजमर्रा की जरूरतों और वर्षों पुराने जीवन-व्यवहार से जुड़ा मार्ग है। ऐसे में बिना पूर्व सूचना मार्ग बंद किए जाने से ग्रामीणों के सामने गंभीर परेशानी उत्पन्न हो गई है।


