_स्वराज जन आंदोलन संस्था के नाम पर एजेंट बनाकर करीब 2000 लोगों को जोड़ा, सदस्यता राशि लेने के बाद संस्थापक पर फरार होने का आरोप_
सिवनी- रोजगार और आर्थिक सहायता देने के नाम पर स्वराज जन आंदोलन संस्था से जुड़े लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। संस्था के एजेंटों और सदस्यों ने सिवनी पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर संस्था के संस्थापक एवं अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, संस्था की ओर से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में एजेंट बनाए गए। इन एजेंटों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की करीब 2000 महिलाओं एवं पुरुषों को संस्था से जोड़ा गया। सदस्यों से 1040 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक की सदस्यता राशि जमा कराई गई। आरोप है कि संस्था की ओर से सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने, सिलाई मशीन देने तथा प्रतिदिन 200 रुपये की आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिलाया गया था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संस्था से जुड़े एजेंटों को प्रतिमाह करीब 20 से 25 हजार रुपये वेतन देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन पिछले करीब तीन महीने से न तो सदस्यों को कथित सहायता राशि मिल रही है और न ही एजेंटों को उनका भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक एजेंटों का करीब 4.20 लाख रुपये वेतन और 60 हजार रुपये वाहन भुगतान भी लंबित है।
शिकायतकर्ताओं ने संस्था के संस्थापक आदित्य राज कोबरा सहित अन्य पदाधिकारियों पर सदस्यों से राशि लेने के बाद उसे वापस नहीं करने के आरोप लगाए हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं ने कथित तौर पर धमकी दिए जाने की बात भी पुलिस के समक्ष कही है। आरोप यह भी है कि संस्था के संस्थापक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हैं और उनके फरार होने की बात कही जा रही है।
मामले को लेकर पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने तथा सदस्यों से ली गई राशि वापस दिलाने की मांग की है।
पीड़ित शबनम अंसारी और शबाना अंसारी ने भी अपनी शिकायत में संस्था से जुड़े घटनाक्रम और कथित आर्थिक नुकसान को लेकर पुलिस के समक्ष अपनी बात रखी।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


