अहमदाबाद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शनिवार को अहमदाबाद में आयोजित आईआईएमए हेल्थकेयर समिट 2026 को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को अपनी स्थापित ‘विश्व की फार्मेसी’ की भूमिका से आगे बढ़कर ‘विश्व की प्रयोगशाला’ के रूप में उभरना होगा, जिसके लिए उसे अपने स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों के केंद्र में अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को रखना होगा। इस कार्यक्रम का विषय ‘स्वास्थ्य सेवा में एआई को बढ़ावा देना’ था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (आईआईएमए) में आयोजित शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को अन्यत्र विकसित दवाओं और टीकों के निर्माण से आगे बढ़कर नवाचार और दवा खोज की दिशा में अधिक प्रगति करने की आवश्यकता है।
इस शिखर सम्मेलन में नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवा उद्योग के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने 2047 तक एक स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर चर्चा करने के लिए भाग लिया। राज्य मंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के दवा उद्योग ने 200 से अधिक देशों को टीकों और आवश्यक चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखी, जबकि भारत के टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 22 लाख से अधिक टीके लगाए गए। उन्होंने कहा कि एआई बेहतर स्क्रीनिंग, नैदानिक निर्णय लेने और रोग निगरानी के माध्यम से दवा खोज को बढ़ावा दे सकता है, व्यक्तिगत उपचार में सहायता कर सकता है और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार ला सकता है।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तकनीक को सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित तरीके से अपनाया जाना चाहिए, जिसमें रोगी की गोपनीयता का ध्यान रखा जाए। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि एआई को मानव नैदानिक निर्णय का पूरक होना चाहिए, न कि उसका विकल्प। उन्होंने एआई अनुप्रयोगों को पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच अधिक सहयोग के माध्यम से जनसंख्या स्तर पर लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य सेवा में एआई के लिए उत्कृष्टता केंद्र एम्स नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में स्थापित किए गए हैं।


