(दुख की घड़ी में वनांचल के प्रभावित परिवारों का थामा हाथ, संस्था ने हरसंभव सहयोग का दिलाया भरोसा)
किरनापुर:- वनांचल ग्राम कोरका, कोंडेकसा एवं बोदरी में बैगा जनजाति के परिवारों पर आई दुख की घड़ी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। क्षेत्र में अज्ञात बीमारी के कारण 29 बच्चों की मृत्यु की दुखद घटना के बाद कई परिवार गहरे सदमे और संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे कठिन समय में युवा समर्पण रक्तदान एंड वेल्फेयर सोसायटी मध्य प्रदेश, बालाघाट की टीम पीड़ित एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंची और मानवता का परिचय देते हुए आवश्यक सामग्री का वितरण किया।
दुर्गम वनांचल तक पहुंचकर संस्था के सदस्यों ने प्रभावित बैगा परिवारों से आत्मीय मुलाकात की। सदस्यों ने परिवारों की पीड़ा को करीब से समझा और उनकी जरूरतों की जानकारी ली। अपनों को खोने के दर्द के बीच जब संस्था के सदस्य उनके घरों तक पहुंचे तो परिवारों को यह एहसास हुआ कि इस मुश्किल घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है।
संस्था की ओर से जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री सहित दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएं वितरित की गईं। इस दौरान संस्था के सदस्यों ने परिवारों को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जरूरत के समय किसी के साथ खड़ा होना ही मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।
दर्द बांटने पहुंची युवा समर्पण रक्तदान एंड वेलफेयर सोसाइटी मध्यप्रदेश बालाघाट की टीम
इस सेवा कार्य में सुभाष सर (संरक्षक), गौतम ब्रम्हे (अध्यक्ष), प्रशांत नागेश्वर (सचिव), दीपांशु वराड़े (कोषाध्यक्ष), कृष्णा पंचेश्वर, आर्यन उपवंशी एवं अश्विन अजीत (सदस्य) की प्रमुख सहभागिता रही।
युवा समर्पण रक्तदान एंड वेल्फेयर सोसायटी मध्य प्रदेश, बालाघाट का उद्देश्य केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। संस्था समाज के जरूरतमंद, वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
संस्था ने कहा कि मासूम बच्चों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस पीड़ा को कम तो नहीं किया जा सकता, लेकिन दुख की इस घड़ी में परिवारों के साथ खड़े होकर उन्हें यह भरोसा जरूर दिया जा सकता है कि वे अकेले नहीं हैं।
संस्था ने भविष्य में भी आवश्यकता के अनुसार वनांचल एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच सेवा कार्य निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
“मानव सेवा ही सच्ची सेवा है—जरूरतमंद के साथ खड़ा होना ही हमारा संकल्प है।”
युवा समर्पण की टीम का यह प्रयास सिर्फ राहत सामग्री का वितरण नहीं, बल्कि उन परिवारों के दर्द में सहभागी बनने और उन्हें यह एहसास दिलाने की एक छोटी-सी कोशिश है कि इंसानियत की संवेदना आज भी जिंदा है।


