उठे सवाल 2020 की घटना के दस्तावेज भी आए सामने, तब भी विद्यार्थियों ने SDM कार्यालय में लगाई थी गुहार*
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से संबंधित PGDCA II Semester (May–June 2026) के परीक्षा परिणाम में लांजी की निर्माण कंप्यूटर संस्था से जुड़े सभी 25 विद्यार्थियों के FAIL होने का मामला सामने आया है। विद्यार्थियों का आरोप है कि TALLY Practical के अंक विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण उन्हें ABSENT दर्शाकर असफल कर दिया गया, जबकि उन्होंने अपनी ओर से आवश्यक प्रायोगिक प्रक्रिया पूरी की थी।
विद्यार्थियों का कहना है कि संस्था स्तर की कथित लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है और उनके शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
25 विद्यार्थी, 0% परिणाम — जांच की मांग
प्राप्त परिणाम विवरण के अनुसार संबंधित 25 विद्यार्थियों में से एक भी विद्यार्थी उत्तीर्ण नहीं हुआ। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय एवं प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा दोषी पाए जाने वाले पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
*2020 की घटना से भी नहीं लिया सबक*
इस मामले में संस्था के पूर्व इतिहास को लेकर भी महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2020 में इसी संस्था का पूर्व नाम “डॉ. एस. राधाकृष्णन इंस्टीट्यूट ऑफ कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी” था और इसका कोड 8030 था।
6 नवंबर 2020 के संस्था के दस्तावेज में विश्वविद्यालय से संबद्धता का उल्लेख करते हुए कुछ विद्यार्थियों को दूसरी संस्था में अध्ययन करने के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) दिए जाने की बात दर्ज है।
इसी अवधि में विद्यार्थियों द्वारा SDM कार्यालय, लांजी में की गई शिकायत का दस्तावेज भी सामने आया है। शिकायत में विद्यार्थियों ने उल्लेख किया था कि उन्होंने वर्ष 2020 में राधाकृष्णन कंप्यूटर में प्रवेश लिया था, लेकिन संस्था द्वारा उन्हें बिना बताए बंद कर दिए जाने से उनका कोर्स प्रभावित हुआ और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया। विद्यार्थियों ने प्रशासन से उनकी समस्या का निराकरण कराने की मांग की थी।
2020 से 2024 तक बंद रहने का दावा, 2025 में नए नाम से शुरुआत विद्यार्थियों के अनुसार, वर्ष 2020 की घटना के बाद यह संस्था वर्ष 2020 से 2024 तक बंद रही। इसके बाद वर्ष 2025 से “निर्माण कंप्यूटर” के नए नाम से इसका संचालन पुनः शुरू हुआ।
ऐसे में वर्तमान में एक बार फिर 25 विद्यार्थियों के एक साथ FAIL होने की घटना सामने आने से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि पूर्व की घटना को देखते हुए वर्तमान मामले की भी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए, ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य संस्थागत अथवा प्रशासनिक लापरवाही का शिकार न बने।
विद्यार्थियों की प्रमुख मांगें
विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि—
✅ TALLY Practical Marks की स्थिति की तत्काल जांच की जाए।
✅ विद्यार्थियों को किस आधार पर ABSENT/FAIL किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
✅ संस्था द्वारा भेजे गए Practical Marks एवं विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।
✅ दोषी पाए जाने पर संबंधित संस्था/व्यक्ति की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
✅ प्रभावित विद्यार्थियों को नियमानुसार री-एग्जाम/पुनर्मूल्यांकन अथवा उचित निराकरण का अवसर दिया जाए।
✅ विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मामले का शीघ्र निराकरण किया जाए।
“गलती हमारी नहीं, सजा हमें क्यों?”
विद्यार्थियों का कहना है कि यदि Practical Marks भेजने अथवा परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में संस्था स्तर पर कोई गलती हुई है, तो उसका नुकसान विद्यार्थियों को नहीं उठाना चाहिए।
विद्यार्थियों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें न्याय दिलाया जाए।
विद्यार्थियों का भविष्य कोई मज़ाक नहीं है — उन्हें उनका हक और न्याय मिलना चाहिए।


