फर्रुखाबाद, 6 सितंबर नीम करौली धाम के मुख्य पुजारी श्री श्री त्यागी जी महाराज ने कहा कि बाबा नीम करौली महाराज को जो सिद्धि प्राप्त हुई वह 1912 से 1935 के बीच इसी धाम में साधना से मिली। यह धाम ही बाबा का मुख्य स्थान है और हनुमान जी की गोबर-मिट्टी से बनी स्वनिर्मित मूर्ति आज भी यहां साक्षात विराजमान है। सरकार द्वारा इसे पर्यटन और तीर्थ सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
महाराज जी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर उन्होंने कहा कि ये सब बाबा का खेल है, पता नहीं बाबा किससे क्या सेवा ले लें। भगवान का कार्य ऐसा ही होता है, पता नहीं किसे क्या दे दें?
उन्होंने बताया कि बाबा का नाम लक्ष्मण दास है और इसी नाम से नीम करौली स्टेशन बना है, जो आश्रम से सिर्फ 5 मिनट की दूरी पर है। बाबा 1912 में यहां आए थे और उन्हें जो सिद्धि प्राप्त हुई, वो इसी गांव में साधना से मिली, जो फर्रुखाबाद जिले में स्थित है।
उन्होंने कहा कि हनुमान जी की जो मूर्ति बाबा ने बनाई और आज भी वैसी ही मौजूद है। शनिवार और मंगलवार को उसका श्रृंगार होता है और चोला चढ़ाया जाता है। बाकी जगहों पर पत्थर की मूर्तियां मिलती हैं, लेकिन यह मूर्ति खुद बाबा के हाथों से निर्मित है। सरकार तीर्थ सर्किट को बहुत अच्छा बनाने जा रही है। इसे पर्यटन स्थल और तीर्थ स्थल घोषित कर दिया गया है और चौकी भी बनवा ली गई है।
उन्होंने बताया कि पहले एक खेड़ा गांव था, लेकिन 2014 के बाद से, खासकर 2015-17 से, बदलाव शुरू हुआ है। आश्रम में बड़ा हॉल, किचन हॉल और दो कमरे बनवाए गए हैं, जो पर्यटन और तीर्थ स्थल बनने के बाद ही संभव हुआ है। इसमें मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान है और इसे और भी बड़ा किया जा रहा है। यह पहले से ही बड़ा धाम है और अब पूरी तरह बन भी गया है। 14-15 साल पहले उन्होंने संकल्प लिया था कि यह बड़ा धाम बनेगा, जो आज पूरा हो गया है।
कैंची धाम को लेकर मुख्य पुजारी ने कहा कि वह पहाड़ी क्षेत्र में है और वहां ठंडा मौसम होने के कारण विदेशी पर्यटक ज्यादा आते हैं, इसलिए वह थोड़ा ज्यादा हाईलाइट हो गया है। लेकिन बाबा का मुख्य और शुरुआती स्थान फर्रुखाबाद जिले का नीम करौली गांव ही है। बाबा को जो कुछ भी सिद्धियां मिलीं, जो भी प्राप्त हुआ, वह यहीं से मिला।


