परसवाड़ा। परसवाड़ा क्षेत्र में शराब के अवैध परिवहन को लेकर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर शराब के कारोबार से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। परसवाड़ा थाना पुलिस ने शराब दुकान से दूसरी दुकान तक शराब के कथित अवैध परिवहन के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर 62.640 बल्क लीटर देशी-अंग्रेजी शराब जब्त की है। जब्त शराब और अन्य सामग्री की कुल कीमत 46,080 रुपए बताई गई है। मामले में पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।
पुलिस के अनुसार 10 सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि परसवाड़ा बस स्टैंड स्थित शराब दुकान से काले रंग की TUV कार में देशी और अंग्रेजी शराब भरकर बीजाटोला स्थित शराब दुकान तक ले जाई जा रही है। सूचना की तस्दीक के लिए पुलिस ने दोनों शराब दुकानों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की। फुटेज में 8 सितंबर को सुबह करीब 9.56 बजे काले रंग की कार में शराब के कार्टून रखे जाने तथा इसके बाद वाहन के बीजाटोला शराब दुकान पहुंचने की जानकारी सामने आई।
पुलिस ने फुटेज और पूछताछ के आधार पर चंदन सिंह राजपूत, राजेश कुमार गुप्ता, रोहित मेरावी और विजय मिश्रा को आरोपी बनाया। पुलिस कार्रवाई में देशी प्लेन मदिरा का एक कार्टून, गोवा के चार कार्टून, मेगडावल रम का एक कार्टून और बेकपाईपर का एक कार्टून जब्त किया गया। इसके अलावा तीन खाली बीयर कार्टून भी मिले।
लगातार परिवहन की बात ने बढ़ाई चिंता
मामले में सामने आए पुलिस रिकॉर्ड से शराब के परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यदि शराब को एक दुकान से दूसरी दुकान तक इस तरह ले जाया जा रहा था, तो सवाल यह भी है कि क्या यह एक बार की घटना थी या लंबे समय से इसी तरह शराब का परिवहन किया जा रहा था? पुलिस जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इस पहलू की भी पड़ताल जरूरी है कि इससे पहले कितनी बार और कितनी मात्रा में शराब का परिवहन किया गया।
यह मामला केवल सात कार्टून शराब की जब्ती तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। क्षेत्र में शराब की उपलब्धता और उसके कथित अवैध वितरण को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। खासकर शराब दुकानों से जुड़े आसपास के गांवों में पैकारी के माध्यम से गुपचुप तरीके से शराब बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक स्थिति जांच का विषय है, लेकिन यदि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो इसका सीधा असर गांवों के सामाजिक माहौल पर पड़ना स्वाभाविक है।
गांवों तक पहुंच रही शराब, युवा वर्ग पर असर की चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में शराब आसानी से उपलब्ध होने की शिकायतों के बीच सबसे बड़ी चिंता युवा वर्ग को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गांवों में युवाओं के बीच शराब सेवन बढ़ रहा है। कम उम्र में नशे की आदत लगने से पढ़ाई, रोजगार और परिवार की जिम्मेदारियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
शराब की बढ़ती उपलब्धता को लेकर सामाजिक स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। परिवारों में आर्थिक परेशानी, घरेलू विवाद और आपसी तनाव जैसी स्थितियों को शराब की लत से जोड़कर देखा जाता है। लंबे समय में यह स्थिति परिवार और सामाजिक ताने-बाने में विघटन की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती है।
केवल गिरफ्तारी नहीं, सप्लाई चैन तक पहुंचना जरूरी
पुलिस की कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल परिवहन करने वालों पर कार्रवाई से अवैध शराब की समस्या समाप्त हो पाएगी? यदि शराब वास्तव में दुकानों से निकलकर आसपास के गांवों तक पैकारी के माध्यम से पहुंच रही है, तो पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी पूरी सप्लाई चैन की जांच करनी होगी।
यह पता लगाना जरूरी है कि शराब कहां से निकलती है, किसके माध्यम से परिवहन होती है और गांवों में किन स्थानों तक पहुंचती है। साथ ही वैध शराब दुकानों से होने वाले स्टॉक और बिक्री के रिकॉर्ड का भी नियमित मिलान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय हो सके।
क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि इस मामले की जांच केवल गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों तक सीमित न रहकर शराब के कथित अवैध परिवहन और ग्रामीण क्षेत्रों में पैकारी की शिकायतों की तह तक पहुंचे। यदि कहीं अवैध बिक्री हो रही है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के साथ युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।


