मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार लगातार बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी PTRI के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 से 2025 के बीच प्रदेश में ओवरस्पीडिंग से जुड़े सड़क हादसों में 65,289 लोगों की मौत हुई है। अकेले वर्ष 2025 में तेज रफ्तार से जुड़े हादसों में 12,818 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि हजारों लोग घायल हुए।
आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सड़क सुरक्षा की चुनौती केवल ब्लैक स्पॉट की पहचान और सड़कों में तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है। वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करना, नियमों का प्रभावी पालन और वाहन चालकों के व्यवहार में बदलाव भी उतने ही जरूरी हैं।
2025 में 46 हजार से ज्यादा हादसे
PTRI के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में ओवरस्पीडिंग से जुड़े 46,904 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें 12,818 लोगों की मौत हुई, जबकि 49,204 लोग घायल हुए।
वर्ष 2023 में ओवरस्पीडिंग से जुड़े हादसों की संख्या 44,592 और मौतों की संख्या 11,380 थी। 2025 तक हादसे बढ़कर 46,904 और मौतें 12,818 तक पहुंच गईं। घायलों की संख्या भी 44,279 से बढ़कर 49,204 हो गई।
छह साल में ढाई लाख से ज्यादा हादसे
वर्ष 2020 से 2025 के बीच ओवरस्पीडिंग से जुड़े कुल 2 लाख 52 हजार 909 हादसे दर्ज किए गए। इनमें 65,289 लोगों की मौत हुई। इसी अवधि में गलत दिशा में वाहन चलाने से जुड़े हादसों में 4,411 और शराब पीकर वाहन चलाने से जुड़े हादसों में 1,712 मौतें दर्ज की गईं।
आंकड़ों के अनुसार 2025 में ओवरस्पीडिंग से हुई मौतों की संख्या गलत दिशा में वाहन चलाने से हुई मौतों की तुलना में लगभग 18 गुना और शराब पीकर वाहन चलाने से जुड़ी मौतों की तुलना में करीब 47 गुना रही।
मोबाइल फोन और रेड लाइट उल्लंघन के मामलों में कमी
रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े हादसे वर्ष 2023 के 821 से घटकर 2025 में 488 रह गए। इन हादसों में मौतों की संख्या भी 185 से घटकर 112 हुई।
इसी तरह रेड लाइट उल्लंघन से जुड़े हादसों की संख्या 2023 के 33 से घटकर 2025 में 12 रह गई। गलत दिशा में वाहन चलाने से जुड़े हादसों में भी कमी दर्ज की गई।
सिर्फ ब्लैक स्पॉट सुधारना पर्याप्त नहीं
लगातार सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार पर्याप्त नहीं होगा। स्पीड मैनेजमेंट, प्रभावी ट्रैफिक एनफोर्समेंट, स्पीड कैमरों का बेहतर इस्तेमाल, नियमित निगरानी और वाहन चालकों में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की व्यापक तस्वीर भी चिंताजनक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से 7 जुलाई 2026 तक करीब 18 महीनों में मध्य प्रदेश में कुल 90,138 सड़क हादसों में 25,869 लोगों की मौत हुई और 95,843 लोग घायल हुए।
रफ्तार कुछ मिनट बचा सकती है, लेकिन इन आंकड़ों का संदेश साफ है सड़क पर कुछ सेकंड की जल्दबाजी किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का इंतजार बन सकती है।


