12वीं के बाद मजदूरी करने को मजबूर हुए संजीव ने प्रशिक्षण लेकर सीखी लकड़ी पर नक्काशी की कला, अब प्रतिमाएं बनाकर कमा रहे 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह
पढ़ाई के साथ वुडन आर्ट में बना रहे पहचान, तरु शिल्प समिति के माध्यम से उत्पाद पहुंच रहे ऑनलाइन बाजार तक
शहडोल 19 सितम्बर 2026- परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति में सीखने और आगे बढ़ने का जज्बा हो तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। शहडोल जिले के खम्हरिया ग्राम पंचायत अंतर्गत पचड़ी गांव निवासी 32 वर्षीय संजीव कुमार बैगा की कहानी भी संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की ऐसी ही प्रेरक कहानी है। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद मां ने उनका पालन-पोषण किया। आर्थिक परिस्थितियों के कारण संजीव 12वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके और मजदूरी करने लगे। हालांकि मन में कुछ बेहतर करने की इच्छा हमेशा बनी रही।
संजीव बताते हैं कि मजदूरी उनके लिए मजबूरी थी। वे ऐसा हुनर सीखना चाहते थे, जिससे उन्हें बेहतर आमदनी के साथ सम्मान भी मिल सके। इसी तलाश में उन्हें शहडोल के छतवई स्थित संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के प्रशिक्षण केंद्र में वुडन क्राफ्ट सीखने का अवसर मिला। उन्होंने इस अवसर को हाथों-हाथ लिया और लगभग 100 दिन का प्रशिक्षण लेकर लकड़ी पर कलाकारी एवं नक्काशी की कला सीखी।
हुनर ने बदली जिंदगी, पढ़ाई भी जारी रखी
वुडन क्राफ्ट का प्रशिक्षण लेने के बाद संजीव ने लकड़ी पर सुंदर एवं आकर्षक प्रतिमाएं बनाना शुरू किया। उनकी कला धीरे-धीरे निखरती गई और उन्हें अपने काम का उचित मूल्य मिलने लगा। वर्तमान में वे अपनी कला के माध्यम से लगभग 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रख पा रहे हैं।
संजीव ने वर्ष 2018 में उच्च शिक्षा के महत्व को समझते हुए बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वे एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने राजस्व निरीक्षक पद के लिए आवश्यक विशेषीकृत डिप्लोमा भी किया है। हालांकि अब संजीव का कहना है कि वुडन आर्ट उन्हें सबसे अधिक पसंद है और वे इसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
तरु शिल्प समिति से जुड़कर बढ़ा बाजार
छतवई स्थित हस्तशिल्प केंद्र में संचालित तरु शिल्प समिति के माध्यम से संजीव सहित अन्य कलाकारों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। जिला प्रशासन के सहयोग से समिति का ट्रेडमार्क कराया गया तथा समिति का पंजीयन भी कराया गया। इसके बाद ऑनलाइन बाजार से जुड़ने की दिशा में पहल की गई।
समिति के उत्पाद अब अमेजन जैसे ऑनलाइन बाजार तक पहुंच रहे हैं। समिति के सदस्यों द्वारा तैयार उत्पादों के फोटो एवं अन्य जानकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उपलब्ध कराई गई। हाल ही में 37 उत्पादों की मांग प्राप्त हुई, जिन्हें तैयार कर पैकिंग के बाद इंदौर स्थित स्टोर भेजा गया है। समिति के कुछ उत्पादों की बिक्री भी हो चुकी है। ऑनलाइन मांग बढ़ने के साथ ही समिति द्वारा प्रतिमाह लगभग 50 से 60 उत्पाद तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
34 सदस्यीय समिति में वुडन क्राफ्ट से जुड़े कलाकार
तरु शिल्प समिति से कुल 34 लोग जुड़े हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग वुडन क्राफ्ट, दरी, कालीन और पेंटिंग के कार्य से जुड़े हैं। वर्तमान में 18 लोग वुडन क्राफ्ट के क्षेत्र में लकड़ी पर नक्काशी और कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। समिति से जुड़कर कलाकारों को अपने हुनर को आगे बढ़ाने और उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
छतवई हथकरघा एवं हस्तशिल्प केंद्र के प्रभारी प्रबंधक एस.एस. पांडे ने बताया कि संजीव कुमार बैगा लगभग तीन-चार वर्ष पूर्व केंद्र से जुड़े थे। उस समय पचड़ी गांव में दरी का प्रशिक्षण चल रहा था, लेकिन संजीव की रुचि वुडन आर्ट में थी। वे लकड़ी पर बेहतर कलाकारी सीखने के लिए अवसर तलाश रहे थे। जिला प्रशासन के सहयोग से तरु शिल्प समिति के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण में उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मेहनत से इस कला को सीखा।
उन्होंने बताया कि संजीव अब एक दिन में 8 से 10 तक मूर्तियां तैयार करने में सक्षम हैं और इससे उन्हें लगभग 12 से 14 हजार रुपए तक की आय हो जाती है। वुडन आर्ट के प्रति उनकी लगन को देखते हुए उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए आवेदन करने की तैयारी भी की जा रही है।
घर बैठे रोजगार और देशभर में बाजार की संभावनाएं
प्रभारी प्रबंधक एस.एस. पांडे ने बताया कि वुडन क्राफ्ट पूरी तरह हाथ की कला है। लकड़ी पर जितनी बेहतर नक्काशी और कलात्मकता होगी, उत्पाद का मूल्य उतना ही अधिक होगा। सोशल मीडिया और ऑनलाइन बाजार के विस्तार के कारण अब कलाकार अपने घर से भी उत्पाद तैयार कर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा सकते हैं।
संजीव कुमार बैगा के लिए वुडन क्राफ्ट केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उनके संघर्ष को नई दिशा देने वाला हुनर बन गया है। कभी आर्थिक परिस्थितियों के कारण मजदूरी करने को मजबूर रहे संजीव आज पढ़ाई के साथ अपने हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं और अपनी कला से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सही प्रशिक्षण, अवसर और मेहनत के माध्यम से व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लिए सफलता का नया रास्ता बना सकता है।


