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September 22, 2026
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अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस का इतिहास: द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही से निकला शांति का वैश्विक संकल्प

नई दिल्ली,  हर साल 21 सितंबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस केवल एक प्रतीकात्मक दिन नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही से उपजे एक वैश्विक संकल्प का परिणाम है। इसकी जड़ें संयुक्त राष्ट्र की स्थापना में ही निहित हैं। 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र बना तो उसके चार्टर के पहले ही वाक्य में लिखा गया था कि आने वाली पीढ़ियों को युद्ध की विभीषिका से बचाना, लेकिन शीत युद्ध के दौरान दुनिया फिर से दो खेमों में बंट गई और शांति का सपना अधूरा लगने लगा। इसी पृष्ठभूमि में 1981 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया। ब्रिटेन और कोस्टा रिका के प्रस्ताव पर महासभा ने प्रस्ताव संख्या 36/67 पारित किया। इसमें हर साल सितंबर के तीसरे मंगलवार को यानी महासभा के वार्षिक सत्र के उद्घाटन दिवस को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। पहला शांति दिवस 1982 में मनाया गया।

हालांकि, जल्द ही यह महसूस किया गया कि इस दिन का प्रभाव कम हो रहा है। इसलिए शांति को एक स्थायी पहचान देने के लिए 2001 में एक और बड़ा बदलाव किया गया। 7 सितंबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव 55/282 पारित किया। ब्रिटेन और कोस्टारिका द्वारा ही लाया गया यह प्रस्ताव दो बड़े बदलाव लेकर आया। पहला, 21 सितंबर इस दिवस की स्थायी तारीख घोषित की गई। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण, इस दिन को वैश्विक युद्धविराम और अहिंसा के दिन के रूप में मनाने का आह्वान किया गया। इसका अर्थ था कि इस दिन दुनिया में कहीं भी युद्धरत पक्षों से अपने हथियार डालने की अपील की जाएगी। संयोग से इस प्रस्ताव के ठीक चार दिन बाद 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में आतंकी हमला हुआ, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया।

इस घटना के बाद शांति दिवस की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई। 2002 में जब पहली बार 21 सितंबर को स्थायी तारीख के रूप में शांति दिवस मनाया गया, तो संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में परंपरागत रूप से शांति की घंटी बजाई गई। यह घंटी 1954 में जापान ने संयुक्त राष्ट्र को भेंट की थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए बच्चों के सिक्कों और पदकों को पिघलाकर बनाई गई थी। तब से हर साल संयुक्त राष्ट्र इस दिन के लिए एक विशेष थीम घोषित करता है, जैसे, सतत विकास के लिए शांति, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ शांति, और नस्लवाद को समाप्त करने के लिए शांति। इसका उद्देश्य यह बताना है कि शांति केवल युद्ध का न होना नहीं, बल्कि गरीबी, भुखमरी, असमानता और जलवायु संकट के खिलाफ भी एक साझा लड़ाई है।

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026 का थीम ‘शांति में निवेश करें: सभी के लिए, हर जगह, हर दिन’ है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे लेकर कहा, आज, भारी अस्थिरता के बीच, शांति की तलाश भारी-भरकम लगती है, लेकिन यह पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं है; यह मानवता की चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने के लिए जरूरी आधार है। यह हमारे दैनिक जीवन में सुरक्षा, सम्मान, अवसरों और सहयोग का जीवंत अनुभव है। यूएन ने कहा, “इस साल (2026) के अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की थीम है ‘शांति में निवेश करें: सभी के लिए, हर जगह, हर दिन। इस थीम के तहत ‘शांति के रोजमर्रा के निर्माताओं’ को सम्मान दिया जा रहा है, वे लोग जो स्थानीय स्तर पर काम कर रहे हैं, स्थिरता की नींव रख रहे हैं और जमीनी स्तर से स्थायी शांति का निर्माण कर रहे हैं। याद रखें, शांति केवल सम्मेलन कक्षों में नहीं बनती, यह हर किसी के द्वारा, हर जगह, हर दिन आकार लेती है।”

 

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