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September 29, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

गन्ने की नई उन्नत किस्में बढ़ाएंगी किसानों की आय, 100 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है उपज

ग्रेटर नोएडा, 29 सितंबर  उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने की दिशा में नई उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की चार नवीन उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया। 

उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (यूपीसीएसआर ) द्वारा विकसित इन किस्मों का उद्देश्य गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है। साथ ही इन किस्मों के जरिए गन्ने की फसल को प्रभावित करने वाले लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रभाव को कम करने पर भी जोर दिया गया है। ट्रेड शो में को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 किस्मों को प्रदर्शित किया गया।

विभाग के अनुसार इन उन्नत किस्मों की संभावित उपज क्षमता करीब 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर तक है। ऐसे में इनका व्यापक स्तर पर उपयोग होने से गन्ने की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में बढ़ोतरी की संभावना है। किसानों को नई किस्मों की विशेषताओं और इनके संभावित लाभों की जानकारी ट्रेड शो में दी जा रही है। गन्ने की फसल में लाल सड़न यानी रेड रॉट एक प्रमुख रोग माना जाता है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

यूपीसीएसआर द्वारा विकसित इन नवीन किस्मों में लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी अथवा प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है। इससे रोग के प्रभाव को कम करने और फसल को अधिक सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग का जोर ऐसी किस्मों को बढ़ावा देने पर है, जिनसे किसानों को उत्पादन के साथ-साथ रोग प्रबंधन में भी लाभ मिल सके। नई किस्मों की एक प्रमुख विशेषता इनका अच्छा अंकुरण और शुरुआती बढ़वार बताया गया है।

शुरुआती अवस्था में बेहतर बढ़वार होने से फसल के विकास में सहायता मिलती है। इसके अलावा इन किस्मों में मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या भी अधिक होने की संभावना है। इससे गन्ने की उत्पादकता के साथ चीनी उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इन नवीन किस्मों की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इनकी अच्छी पेड़ी क्षमता है। पेड़ी फसल में पहले से खड़े गन्ने की कटाई के बाद उसी खेत से अगली फसल प्राप्त की जाती है। यदि पेड़ी का उत्पादन अच्छा रहता है तो किसानों को दोबारा फसल तैयार करने में लगने वाली लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे श्रम, बीज और खेत की तैयारी से जुड़ी लागत में बचत की संभावना रहती है।

विभाग के अनुसार, नई उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर उत्पादन हासिल करने के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है। बेहतर उपज, रोगों के प्रति सहनशीलता, अच्छी शुरुआती बढ़वार और पेड़ी क्षमता जैसी विशेषताओं के कारण इन किस्मों को गन्ना किसानों के लिए उपयोगी विकल्प के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इन किस्मों का प्रदर्शन किसानों, कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों और आगंतुकों को गन्ने की खेती में हो रहे अनुसंधान और तकनीकी बदलावों से परिचित कराने का माध्यम भी बन रहा है। सरकार और गन्ना अनुसंधान संस्थानों की ओर से विकसित इन किस्मों के जरिए प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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