नईदिल्ली पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के बहुचर्चित अरबों रुपये के ऋण घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रभावी समन्वय से सीबीआई ने मुख्य आरोपी नीरव मोदी के करीबी और रेड नोटिस वाले भगोड़े संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात से भारत डिपोर्ट (प्रत्यार्पित) कराने में सफलता प्राप्त की है।रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के महज दो महीने के भीतर यह कार्रवाई पूरी की गई। संदीप मिस्त्री सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (BSFB), मुंबई द्वारा दर्ज पीएनबी धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से वांछित चल रहा था।
जांच में सामने आया कि वह फर्जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदों (इंटरनेशनल ट्रेड ट्रांजैक्शन) के जरिए बैंक को भारी आर्थिक चपत लगाने वाले सिंडिकेट का एक अहम मोहरा था। उसने घोटाले में शामिल विभिन्न शेल व डमी संस्थाओं के बीच मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाई और उनके दैनिक कामकाज की देखरेख की।सबूतों को नष्ट करने और एजेंसियों से बचने के लिए वह सेल्फ-डिलीटिंग (स्वतः मिटने वाले) गोपनीय संचार माध्यमों के जरिए निर्देश जारी करता था। इसके अलावा, आरोपी ने हीरे, सोने व मोतियों के जेवरात के फर्जी आयात-निर्यात के जाली दस्तावेज तैयार कराने में अहम भूमिका निभाई।
उसने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के डमी डायरेक्टर्स को गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर अन्यत्र शिफ्ट किया, उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए और उन्हें कंपनियों के वास्तविक मालिक होने के फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, उसने यूएई में खोली गई डमी कंपनियों के बैंक खातों से नकदी निकालने की प्रक्रिया को भी अंजाम दिया। मामले में पहले ही सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।सीबीआई के अनुरोध पर जुलाई 2026 में इंटरपोल के जरिए संदीप मिस्त्री के खिलाफ ‘रेड नोटिस’ जारी किया गया था। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उसकी भौगोलिक स्थिति (जियो-लोकेशन) ट्रेस होते ही यूएई अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेकर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी। 28 सितंबर 2026 की देर रात 11:55 बजे उसे मुंबई लाया गया, जहां सीबीआई की BSFB टीम ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।


