*अमरकंटक, थाना और इंदिरा तिराहे पर वर्षों से बंद फव्वारों को लेकर अधिवक्ता जयंत राव ने उठाए सवाल*
अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर के प्रमुख तिराहों पर शहर के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से लगाए गए फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े हैं। अमरकंटक तिराहा, थाना तिराहा और इंदिरा तिराहा सहित अन्य स्थानों पर बंद पड़े फव्वारों की बदहाल स्थिति को लेकर अधिवक्ता, पूर्व राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव एवं समाजसेवी जयंत राव ने नगर पालिका एवं जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
जयंत राव ने मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिन फव्वारों को शहर की सुंदरता बढ़ाने और प्रमुख तिराहों को आकर्षक बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, वे लंबे समय से बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव में इनकी स्थिति अब सौंदर्यीकरण के बजाय बदहाली की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है।
उन्होंने कहा कि अनूपपुर जिला मुख्यालय में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित जिले के तमाम आला अधिकारी निवासरत एवं पदस्थ हैं। इसके बावजूद प्रमुख तिराहों पर वर्षों से बंद पड़े फव्वारों की स्थिति पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जाना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
*नगर पालिका की जिम्मेदारी पर भी सवाल*
जयंत राव ने कहा कि ये क्षेत्र नगर पालिका अनूपपुर के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में नगर पालिका सीएमओ, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं संबंधित वार्ड पार्षदों की जिम्मेदारी बनती है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित सौंदर्यीकरण की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फव्वारे तकनीकी खराबी, विद्युत व्यवस्था, पानी की समस्या अथवा रखरखाव के अभाव में बंद हैं तो नगर पालिका द्वारा उनकी जांच कराकर मरम्मत क्यों नहीं कराई जा रही है। वहीं यदि ये फव्वारे पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं तो उन्हें जर्जर अवस्था में छोड़ने के बजाय व्यवस्थित तरीके से हटाने अथवा पुनर्विकसित करने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
*सार्वजनिक धन के उपयोग और रखरखाव पर जवाबदेही जरूरी*
जयंत राव ने कहा कि मामला केवल बंद पड़े फव्वारों का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन से तैयार कराई गई व्यवस्थाओं के रखरखाव और जवाबदेही का भी है। यदि शहर के सौंदर्यीकरण पर राशि खर्च की गई है तो उसके संरक्षण और उपयोग की व्यवस्था भी संबंधित निकाय को सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने जिला प्रशासन एवं नगर पालिका से मांग की कि अमरकंटक, थाना और इंदिरा तिराहे सहित अन्य स्थानों पर स्थापित फव्वारों की स्थिति का निरीक्षण कराया जाए। जो फव्वारे चालू किए जा सकते हैं, उनकी आवश्यक मरम्मत कराकर उन्हें पुनः संचालित किया जाए तथा जो पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं, उनके संबंध में उचित निर्णय लिया जाए।
जयंत राव ने कहा कि शहर की सुंदरता केवल नई योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि पहले से निर्मित सार्वजनिक संपत्तियों के नियमित रखरखाव से भी कायम रहती है। अब देखना होगा कि नगर पालिका और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी वर्षों से बंद पड़े इन फव्वारों की ओर कब ध्यान देते हैं।


