नगरपालिका के कार्यादेश के बाद SECL की आपत्ति, खसरा क्रमांक 1200 की भूमि और निर्माण अनुमति को लेकर बढ़ा विवाद; जनता ने निर्माण शुरू कराने का ज्ञापन सौंपा
प्रहलाद गुप्ता कोतमा- पसान भालूमाड़ा। वार्ड क्रमांक 11 में प्रस्तावित सार्वजनिक मंगल भवन का निर्माण अब भूमि, अनुमति और प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के बीच घिर गया है। नगर पालिका परिषद पसान ने ₹19,28,860 की लागत से निर्माण का कार्यादेश जारी किया था, लेकिन बाद में SECL कोतमा-गोविंदा उपक्षेत्र ने निर्माण स्थल को माइनिंग लीज क्षेत्र का हिस्सा बताते हुए आपत्ति दर्ज कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए।
कार्यादेश के बाद SECL की रोक ने बढ़ाई उलझन
नगरपालिका के 15 दिसंबर 2025 के कार्यादेश के अनुसार मंगल भवन का निर्माण नौ माह में पूरा किया जाना था। इसके बाद 9 सितंबर 2026 को SECL ने ग्राम पसान स्थित खसरा क्रमांक 1200 को कोतमा कोलियरी की माइनिंग लीज भूमि का हिस्सा बताते हुए नगरपालिका को पत्र भेजा। SECL के अनुसार निर्माण से पहले अनुमति और NOC नहीं लिया गया था। विभाग ने तत्काल निर्माण रोकने तथा सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना आगे काम नहीं करने के निर्देश दिए।
SECL ने अपने पत्र में 25 सितंबर 1947 के अधिग्रहण अवॉर्ड का भी उल्लेख किया है। विभाग ने बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति निर्माण को अपने अभिलेखों के अनुसार अनधिकृत बताते हुए निर्देशों की अनदेखी पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
कार्यादेश पहले, आपत्ति बाद में—कहां हुई चूक?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्यादेश जारी करने से पहले भूमि की स्थिति और आवश्यक अनुमतियों की जांच किस स्तर पर हुई थी? यदि संबंधित भूमि माइनिंग लीज में आती है और निर्माण के लिए अनुमति आवश्यक थी, तो यह स्थिति कार्यादेश से पहले स्पष्ट क्यों नहीं हुई?
वहीं, यदि नगरपालिका के पास निर्माण के अधिकार अथवा अनुमति से जुड़े दस्तावेज हैं, तो उन्हें सामने रखकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। ₹19.28 लाख के सार्वजनिक निर्माण की प्रक्रिया अब सीधे जवाबदेही के सवालों से जुड़ गई है।
जनता बोली—मंगल भवन का निर्माण शुरू करो
इसी बीच भालूमाड़ा क्षेत्र के नागरिकों ने नगर पालिका अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर रोके गए मंगल भवन का निर्माण पुनः शुरू कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि क्षेत्र में लंबे समय से सार्वजनिक मंगल भवन की आवश्यकता है और इसके अभाव में गरीब, जरूरतमंद तथा मध्यमवर्गीय परिवारों को विवाह, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन में परेशानी होती है।
ज्ञापन में निर्माण शीघ्र शुरू नहीं होने पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
नगरपालिका उपाध्यक्ष का पलटवार—मंगल भवन से विरोध नहीं, नियमों पर सवाल
विवाद के बीच नगरपालिका उपाध्यक्ष ने अपने ऊपर लगाए जा रहे निर्माण रुकवाने के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि नियमों की समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
उपाध्यक्ष के अनुसार, SECL अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्हें मंगल भवन की अनुमति को लेकर सवालों की जानकारी मिली। उन्होंने यह मामला CMO और संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में रखने की बात कही है। उनका कहना है कि निर्माण पर रोक लगना मात्र किसी की गलती साबित नहीं करता, लेकिन अनुमति को लेकर सवाल उठें तो निष्पक्ष जांच जरूरी है।
स्वामित्व से कार्यादेश तक, उठाए कई सवाल
नगरपालिका उपाध्यक्ष ने पूछा है कि यदि मंगल भवन और कॉम्प्लेक्स की भूमि SECL की है तो कानूनी स्वामित्व किसके पास है, निर्माण की अनुमति किसने दी, स्वीकृत नक्शा क्या है और कार्यादेश किस आधार पर जारी हुआ?
उन्होंने भवन के भविष्य के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही CMO से अनुमति-पत्र, स्वीकृत नक्शा, कार्यादेश और भुगतान संबंधी अभिलेख जनता के सामने रखने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण नियमानुसार है तो वे विकास कार्य का समर्थन करेंगे।
क्या जमीन- अनुमति का विवाद है या राजनीति भी?
मंगल भवन को लेकर स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या मामला केवल भूमि और अनुमति से जुड़ा है या इसके पीछे राजनीतिक खींचतान की भी भूमिका है?
एक ओर जनता निर्माण शुरू कराने की मांग कर रही है, दूसरी ओर नगरपालिका उपाध्यक्ष नियमों और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। हालांकि उपलब्ध SECL पत्र में किसी जनप्रतिनिधि के राजनीतिक हस्तक्षेप को निर्माण रोकने का कारण नहीं बताया गया है। SECL की आपत्ति भूमि और अनुमति/NOC से संबंधित है।
इसलिए राजनीतिक भूमिका को लेकर फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित पक्षों के आधिकारिक दस्तावेज और जवाब सामने आना जरूरी है।
अब जनता को चाहिए साफ जवाब
एक तरफ ₹19.28 लाख का कार्यादेश, दूसरी तरफ SECL की आपत्ति, तीसरी ओर निर्माण शुरू कराने के लिए जनता का ज्ञापन और चौथी ओर नगरपालिका उपाध्यक्ष द्वारा उठाए गए सवाल—मंगल भवन का मामला अब नगर की चर्चा का केंद्र बन गया है।
अब स्पष्ट होना जरूरी है कि खसरा क्रमांक 1200 की वास्तविक स्थिति क्या है, निर्माण के लिए कौन-सी अनुमति आवश्यक थी, कार्यादेश किस आधार पर जारी हुआ और निर्माण रोकने के बाद आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
मंगल भवन का निर्माण जनता की जरूरत है, लेकिन जमीन और अनुमति का विवाद भी दस्तावेजों से साफ होना जरूरी है। अब सवाल यही है—₹19.28 लाख का कार्यादेश जारी होने के बाद यह पेंच सामने क्यों आया और मंगल भवन के निर्माण का रास्ता आखिर कब साफ होगा?


