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October 3, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

ब्यौहारी में गूंजा साहित्य, संस्कार और बाल प्रतिभाओं का स्वर
बाल साहित्य उत्सव में रचनाकारों ने बच्चों को दिखाई सृजन

और सपनों की राह, पूर्णेन्दु कुमार सिंह “सुदीर्घ साधना सम्मान-2026” से सम्मानित
ब्यौहारी। गांधी जयंती एवं विश्व अहिंसा दिवस के अवसर पर 02 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल स्कूल, मऊ, ब्यौहारी में पंडित रमाविलास सेवा संस्थान, ब्यौहारी द्वारा बाल साहित्य उत्सव एवं सुदीर्घ साधना सम्मान-2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल काव्य-पाठ प्रतियोगिता, साहित्यिक व्याख्यान, कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह तथा गांधी जीवन-दर्शन प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं संस्थापक पंडित रमाविलास जी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि श्री रामनिहोर तिवारी, सुप्रसिद्ध रचनाकार, बल्होड, उमरिया रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री संतोष उपाध्याय, अध्यक्ष, अखिल भारतीय ब्राह्मण सेवा संस्थान, ब्यौहारी ने की। विशिष्ट अतिथि श्री संतोष द्विवेदी “लोकनाथ”, वरिष्ठ साहित्यकार, कवि एवं पत्रकार, उमरिया रहे।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन प्रसिद्ध गजलकार श्री राजकुमार महोबिया, उमरिया ने किया। श्री शिवपाल तिवारी, अध्यक्ष, हिंदी साहित्य सम्मेलन, ब्यौहारी इकाई ने अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत किया।
पूर्णेन्दु कुमार सिंह को “सुदीर्घ साधना सम्मान-2026”
साहित्य के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय से सक्रिय वरिष्ठ साहित्यकार एवं गजलकार श्री पूर्णेन्दु कुमार सिंह को उनके दीर्घकालीन साहित्यिक योगदान के लिए “सुदीर्घ साधना सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया।
श्री पूर्णेन्दु कुमार सिंह ने बाल साहित्य के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा उनकी गजलों ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सात विद्यालयों के बच्चों ने किया बाल काव्य-पाठ
बाल काव्य-पाठ प्रतियोगिता में कुल सात विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया—
1. जवाहर नवोदय विद्यालय
2. क्रिस्ता ज्योति मिशन स्कूल
3. सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल
4. गाँधी मेमोरियल विद्यालय
5. विवेकानंद उच्च विद्यालय
6. सुन्नीबाई केशरवानी विद्यालय
7. संदीपनी विद्यालय
सभी प्रतिभागी बच्चों ने आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ काव्य-पाठ प्रस्तुत कर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
प्रतियोगिता का परिणाम
प्रथम स्थान — सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल
द्वितीय स्थान — क्रिस्ता ज्योति मिशन स्कूल
तृतीय स्थान — जवाहर नवोदय विद्यालय
विजेता विद्यालयों एवं सभी प्रतिभागी बच्चों को बधाई देते हुए आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि, आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति एवं अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कवियों एवं साहित्यकारों की रचनाओं ने बांधा समां
कार्यक्रम में अरुण पयासी, शिवपाल तिवारी, कैलाश हलवाई, राजकुमार महोबिया, श्रीमती विभूति तिवारी, मिथिलेश राय, श्रीमती गोपी नवीन शुक्ला, शिवानंद पटेल,  सरोज पांडेय, श्रीमती अश्विनी तिवारी, टी.के. सिंह, दीपक कुमार गुप्ता, शरद तिवारी एवं  सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
शहडोल की श्रीमती गोपी नवीन शुक्ला ने अपनी कविता “बच्चे चित्र बना रहे हैं” के माध्यम से बाल कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्त करते हुए कहा—
“बच्चे बड़े चित्रकार हैं,
वीरान होती दुनिया में रंग भरते जा रहे हैं लगातार।”
श्री दीपक कुमार गुप्ता, बाणसागर-देवलोंद ने संघर्ष और मेहनत का संदेश देते हुए प्रस्तुत किया—
“संघर्ष कड़ा है, मेहनत का फल और होगा,
उड़ते हुए परिंदे का कहीं तो ठौर होगा,
कभी तो अपना भी एक दौर होगा।”
उमरिया के प्रसिद्ध गजलकार श्री राजकुमार महोबिया ने बच्चों के सपनों को स्वर देते हुए कहा—
“सपनों की ताबीर सजाए बैठे हैं,
नैनों में ये विश्व समाए बैठे हैं,
आओ इनको मुक्त गगन देकर देखें,
बच्चे कब से पंख उगाए बैठे हैं।”
श्रीमती विभूति तिवारी ने बाल काव्य-पाठ के माध्यम से बच्चों को पुस्तकों से जुड़ने और अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। टी.के. सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय साहित्य प्रभा मंच, बांसी, जिला मैहर ने बाल साहित्य को बच्चों में मूल्य, संवेदनशीलता एवं रचनात्मकता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
अन्य रचनाकारों ने भी बाल मन, प्रकृति, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं, संघर्ष, आशा और बेहतर भविष्य जैसे विषयों पर अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियां दीं।
गांधी जीवन-दर्शन प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम स्थल पर गांधी जीवन-दर्शन पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित चित्र, चरखा, हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां तथा सत्य, अहिंसा और स्वावलंबन से जुड़े विषय प्रदर्शित किए गए।
दांडी मार्च, चंपारण सत्याग्रह एवं भारत छोड़ो आंदोलन से संबंधित चित्रों एवं लघु फिल्म के माध्यम से विद्यार्थियों को गांधीजी के जीवन और विचारों से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने “वैष्णव जन तो तेने कहिए” पर आधारित प्रस्तुति देकर गांधीजी के विचारों को भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया।
डॉ. अरुण कुमार पयासी ने सराहा रवि मिश्रा का प्रयास
डॉ. अरुण कुमार पयासी “बघेली बंधव” ने शिक्षा, साहित्य एवं बघेली भाषा के प्रति रवि मिश्रा के प्रयासों की सराहना करते हुए अपनी रचना के माध्यम से शुभकामनाएं दीं—
“शिक्षा के रवि, श्री रवि मिश्रा,
शिक्षक कुशल प्रशासक।
कीर्तिमान रचे रहे निरंतर,
बोली के उन्नायक।।
गांधी दर्शन का जन-जन तक,
करते नित्य प्रचार।
अनुशासन के मूल्य सिखाते,
सत्य अहिंसा के पतवार।।”
उन्होंने अपने वक्तव्य में मऊ की ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक परंपरा से जुड़े स्थानीय संदर्भों का उल्लेख किया तथा बघेली भाषा और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रमुख अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सर्वश्री लालबहादुर सिंह, रामबदन पांडेय, रोशन नागपाल, रामबहोर तिवारी, मो. चांद खान, सूर्यभान यादव, अरुण तिवारी, जवाहर पांडेय, कौशलेन्द्र सिंह एवं हरिशरण द्विवेदी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सभी अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी उपस्थिति एवं सहयोग से बाल साहित्य उत्सव को गरिमा और व्यापकता प्राप्त हुई।
साहित्य और संस्कारों को जीवित रखने का संकल्प
कार्यक्रम के आयोजक रवि मिश्रा ने कहा कि बाल साहित्य उत्सव का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि बच्चों और समाज में साहित्यिक चेतना, मानवीय संवेदना, रचनात्मकता एवं जीवन-मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों तथा साहित्य की सामाजिक भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल स्कूल परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक साहित्यप्रेमी, शिक्षक, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बाल काव्य-पाठ, कवि सम्मेलन और साहित्यिक प्रस्तुतियों से देर शाम तक कार्यक्रम स्थल साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
बाल साहित्य उत्सव ने यह संदेश दिया कि बच्चों को यदि सृजन, अभिव्यक्ति और सपनों के लिए उचित मंच दिया जाए, तो उनकी प्रतिभा समाज और राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

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