डीएनए जांच में आरोपी भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया; हाईकोर्ट ने दो महीने में विस्तृत जांच पूरी करने को कहा
जबलपुर। छतरपुर के बागेश्वर धाम से जुड़े 16 वर्षीय किशोरी के कथित यौन अपराध मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया, लेकिन अदालत ने अन्य परिस्थितियों को देखते हुए उसकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। छतरपुर पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच दल गठित कर विस्तृत पड़ताल कराने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने यह आदेश 25 सितंबर को दिया था। अदालत ने जांच दल को पता लगाने के लिए कहा है कि किशोरी के साथ यौन अपराध किसने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है। जांच दो महीने में पूरी कर निष्कर्षों के अनुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश हैं।
डीएनए रिपोर्ट और बयानों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल
जांच के दौरान किशोरी के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी। गर्भसमापन के बाद सुरक्षित रखे गए नमूनों की फोरेंसिक जांच हुई। सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान किशोरी ने आरोपी के विरुद्ध यौन अपराध के आरोप का समर्थन भी नहीं किया। उसके पूर्व बयानों और अदालत में दिए बयान के अंतर पर भी हाईकोर्ट ने विचार किया।
डीएनए परिणाम के बावजूद अदालत ने जमानत देने से इनकार किया और मामले की विस्तृत जांच आवश्यक मानी। यह आदेश जमानत अर्जी पर दिया गया है; इससे आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। किशोरी का नाम, पता और पहचान उजागर करने वाला कोई विवरण प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।


