*पुलिस अधीक्षक से लेकर SECL महाप्रबंधक तक पहुंची शिकायत, अश्लील हरकतों, जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप—पीड़िता ने मांगा न्याय, अब निष्पक्ष जांच की बारी।*
प्रहलाद गुप्ता कोतमा-/ कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत VIP गेस्ट हाउस जमुना कोतमा ( भालूमाड़ा)
में पदस्थ एक आदिवासी विधवा महिला कर्मचारी ने साथी कालरी कर्मचारी लक्ष्मी केवट पर छेड़छाड़, अश्लील हरकतें, जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार, आरोपित की कथित हरकतों से परेशान होकर उसने 8 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक अनूपपुर, अजाक थाना अनूपपुर, भालूमाड़ा थाना तथा SECL जमुना-कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई और न्याय की गुहार लगाई है।
*ड्यूटी के दौरान अश्लील हरकत का आरोप-*
कालरी कर्मचारी पीड़िता महिला उम्र लगभग 34 वर्ष बताई गई है और जो हालो ब्लांक भालूमाड़ा क्षेत्र की निवासी है, ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 7 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4:15 बजे वह VIP गेस्ट हाउस में ड्यूटी कर रही थी। इसी दौरान वहां पदस्थ किचन कुक लक्ष्मी केवट कथित तौर पर उसके पीछे आया और अश्लील इशारे करने लगा। महिला का आरोप है कि लक्ष्मी केवट ने गलत नीयत से उसके निजी अंगों को छूकर दबाया। पीड़िता के मुताबिक, उसने तत्काल आरोपी को डांटते हुए ऐसी हरकत दोबारा नहीं करने की चेतावनी दी और पुलिस में शिकायत करने की बात कही। महिला का दावा है कि घटना के समय गेस्ट हाउस में कुछ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे तथा एक कर्मचारी ने भी कथित घटना को देखा है।
*अधिकारियों के जाने के बाद बढ़ा विवाद, वीडियो बनाने का आरोप-*
शिकायत के अनुसार, गेस्ट हाउस जमुना कोतमा भालूमाड़ा से अधिकारियों के चले जाने के बाद महिला ने
लक्ष्मी केवट से उसकी कथित हरकतों को लेकर सवाल एवं डॉट फटकार लगाई और पुलिस में शिकायत करने की बात दोहराई। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान लक्ष्मी केवट ने अपने मोबाइल से उसका वीडियो बनाने लगा। महिला ने आगे आरोप लगाया कि लक्ष्मी केवट ने उसके साथ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया, अपमानजनक बातें कहीं और अश्लील इशारे किए।
पीड़िता ने शिकायत में यह भी दावा किया है कि लक्ष्मी केवट ने अपने भतीजे की राजनीतिक पहुंच तथा SECL और पुलिस अधिकारियों तक प्रभाव होने की बात कहकर कार्रवाई से बेखौफ होने का प्रदर्शन किया। महिला के अनुसार, उसे यह भी धमकी दी गई कि शिकायत करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। लक्ष्मी केवट का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
*विधवा और आदिवासी महिला होने के बावजूद न्याय के लिए संघर्ष-*
पीड़िता का कहना है कि आरोपी की कथित अभद्रता और मानसिक प्रताड़ना से वह पहले भी परेशान रही, लेकिन उसने कई बार परिस्थितियों को नजरअंदाज किया। हालांकि, 7 अक्टूबर की कथित घटना के बाद उसने शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
महिला ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की जाए, घटना के समय मौजूद कर्मचारियों के बयान लिए जाएं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उसे किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव से सुरक्षा देने पर भी विचार किया जाए।
पुलिस और SECL प्रबंधन के सामने अब जवाबदेही की कसौटी मामला केवल दो कर्मचारियों के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। शिकायत में लगाए गए आरोप कार्यस्थल पर महिला की सुरक्षा, सम्मानजनक वातावरण और अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
अब पुलिस प्रशासन के सामने यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच हो, घटना के संभावित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएं, मोबाइल वीडियो सहित उपलब्ध साक्ष्यों की वैधानिक तरीके से जांच की जाए और आरोपों के अनुरूप कानून के तहत कार्रवाई पर निर्णय लिया जाए।
*कालरी प्रबंधक से न्याय की गुहार -*
वहीं, SECL जमुना-कोतमा क्षेत्र प्रबंधन को भी शिकायत की जानकारी मिलने पर कार्यस्थल की सुरक्षा और लागू सेवा नियमों के तहत उचित कदम उठाने पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी कर्मचारी को राजनीतिक पहुंच या प्रभाव का कथित हवाला देकर जांच से ऊपर नहीं माना जा सकता। अब सवाल — है कि आखिर न्याय की फाइल चलेगी या पहुंच का पहिया कानून की किताब में पद, पहचान और राजनीतिक रसूख से ऊपर न्याय है; फिर शिकायत करने वाली महिला को अपनी बात साबित करने के लिए दर-दर भटकना क्यों पड़े।
*आदिवासी महिला के सब्र की परिक्षा न ले-*
VIP गेस्ट हाउस में यदि किसी महिला कर्मचारी के साथ ऐसी घटना होने का आरोप सामने आता है, तो यह केवल शिकायतकर्ता की परीक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही की भी कसौटी है। सवाल यह नहीं कि आरोपी कितना प्रभावशाली होने का दावा करता है, सवाल यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कितनी तत्परता से होती है।अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन शिकायत पर साक्ष्य-आधारित कार्रवाई करता है या न्याय की फाइल भी दफ्तरों के चक्कर काटती रहती है। पीड़िता की निगाहें पुलिस अधीक्षक अनूपपुर, अजाक थाना, भालूमाड़ा पुलिस और SECL प्रबंधन की ओर टिकी हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और
लक्ष्मी केवट का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
*कहना है -*
शिकायत मिली है मामले की जांच चल रही है,, जांच के बाद शिकायत में सत्यता पाईं गईं तो महिला की शिकायत पर कानून कार्यवाही की जाएगी।
राधिका भगत
थाना प्रभारी ,, भालूमाड़ा थाना,,
जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश


