जबलपुर। गोहलपुर-हनुमानताल क्षेत्र के चार खंबा स्थित मां बूढ़ी खेरमाई मंदिर में आस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था का भी लंबा इतिहास जुड़ा है। करीब 1500 वर्ष पुराने इस मंदिर में वर्ष 1992 के दंगों के बाद से सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती है। मंदिर में सातों दिन 24 घंटे पुलिसकर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए जाते हैं।
पांच शिलाओं के रूप में पूजी जाती हैं देवियां
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में मां बूढ़ी खेरमाई के साथ मरही माता, शीतलामाई, महुआरानी और महामारी माता पांच शिलाओं के रूप में विराजमान हैं। नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का संबंध गोंड समाज की धार्मिक परंपराओं से भी माना जाता है।
नवरात्र में बढ़ाई जाती है सुरक्षा
नवरात्र के दौरान मंदिर के पास मछली मार्केट क्षेत्र में 10 दिनों के लिए पुलिस फिक्स प्वाइंट बनाया जाता है। वहीं, बड़ी खेरमाई मंदिर के पास नौ दिनों के लिए अस्थायी थाना स्थापित किया जाता है, ताकि शिकायतों और आपात स्थितियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। मंदिर परिसर और आसपास सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाती है।
प्रशासन के अधीन है मंदिर का प्रबंधन
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 में मंदिर की तत्कालीन समिति भंग कर प्रबंधन जिला प्रशासन के अधीन लिया गया था। इसी वर्ष मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष कलेक्टर हैं। धार्मिक परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के कारण यह मंदिर जबलपुर के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है।


