30.5 C
Jabalpur
October 14, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैलीDharm

दशमहाविद्या: मां आदिशक्ति के 10 दिव्य स्वरूप, हर भक्त के लिए खास

नई दिल्ली,  हिंदू धर्म की शाक्त परंपरा में दशमहाविद्या दस देवियों के एक समूह को कहा जाता है। ‘महाविद्या’ का सामान्य अर्थ ‘महान ज्ञान’ से जुड़ा है। इन देवियों की उपासना विशेष रूप से शाक्त और तांत्रिक परंपराओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में इनके स्वरूप, क्रम और व्याख्याओं में कुछ अंतर भी मिलता है। आम तौर पर जिन दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है, उनमें काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। विद्वत अध्ययनों के अनुसार यही क्रम और समूह आधुनिक स्रोतों में सबसे अधिक प्रचलित है। कहा जाता है कि जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जाने से शिव जी ने माता सती को रोका, तो क्रोध में सती ने अपना विराट रूप दिखाया।

शिव जी जिस भी दिशा में जाते, उन्हें माता का एक नया रूप दिखता। इस तरह 10 दिशाओं में 10 रूप प्रकट हुए। वही दशमहाविद्या कहलाईं। काली: दशमहाविद्याओं में काली का स्थान प्रमुख है। उनका स्वरूप समय, मृत्यु और परिवर्तन से जुड़े प्रतीकों के साथ चित्रित किया जाता है। शाक्त परंपरा में काली को देवी के उग्र स्वरूपों में गिना जाता है। तारा: तारा दशमहाविद्याओं की दूसरी देवी मानी जाती हैं। उनका संबंध देवी की उस परंपरा से है जिसमें उन्हें संकट से पार लगाने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है। तारा की उपासना शाक्त और तांत्रिक परंपराओं में मिलती है। त्रिपुरसुंदरी: त्रिपुरसुंदरी को षोडशी नाम से भी जाना जाता है। उनका संबंध विशेष रूप से श्रीविद्या परंपरा से है।

इस परंपरा में त्रिपुरसुंदरी की उपासना का महत्वपूर्ण स्थान है। भुवनेश्वरी: भुवनेश्वरी को दशमहाविद्याओं में चौथी देवी के रूप में रखा जाता है। उनके नाम का संबंध ‘भुवन’ यानी संसार या जगत से माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में उन्हें जगत की अधिष्ठात्री देवी के रूप में संबोधित किया जाता है। छिन्नमस्ता: छिन्नमस्ता का स्वरूप दशमहाविद्याओं में सबसे विशिष्ट और प्रतीकात्मक रूपों में माना जाता है। पारंपरिक चित्रण में उन्हें अपना ही सिर धारण किए हुए दिखाया जाता है। उनके स्वरूप की व्याख्या विभिन्न शाक्त परंपराओं में अलग-अलग प्रतीकों के माध्यम से की जाती है।

भैरवी: भैरवी को दशमहाविद्याओं की छठी देवी माना जाता है। उनका स्वरूप शक्ति, तप और उग्रता से जुड़े प्रतीकों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। शाक्त साहित्य में भैरवी की अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं मिलती हैं। धूमावती: धूमावती का स्वरूप अन्य महाविद्याओं से अलग है। उन्हें सामान्यतः वृद्धा और विधवा स्वरूप में चित्रित किया जाता है। उनका संबंध वैराग्य और जीवन के कठिन पक्षों से जोड़कर समझाया जाता है। बगलामुखी: बगलामुखी दशमहाविद्याओं में आठवें स्थान पर मानी जाती हैं। उनके पारंपरिक चित्रण में उन्हें एक विशेष मुद्रा में दिखाया जाता है, जिसमें वे एक व्यक्ति की वाणी और गतिविधि को रोकने का प्रतीक प्रस्तुत करती हैं। इसी कारण उनकी उपासना को तांत्रिक परंपराओं में विशिष्ट स्थान मिला है।

मातंगी: मातंगी दशमहाविद्याओं की नौवीं देवी हैं। उनका संबंध वाणी, संगीत और कला से जुड़े प्रतीकों के साथ बताया जाता है। उन्हें कई शाक्त परंपराओं में देवी सरस्वती के कुछ पहलुओं से संबंधित माना जाता है, हालांकि दोनों देवियों की धार्मिक पहचान अलग है। कमला: कमला दसवीं और अंतिम महाविद्या मानी जाती हैं। उनका स्वरूप कमल और समृद्धि से जुड़े प्रतीकों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। कई परंपराओं में कमला को देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ा जाता है। दशमहाविद्या को नवदुर्गा से अलग समझना जरूरी है।

नवदुर्गा में नौ नाम, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, शामिल हैं। इन नौ रूपों की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों के क्रम में की जाती है। वहीं दशमहाविद्या दस देवियों का समूह है, जिसका संबंध विशेष रूप से शाक्त और तांत्रिक धार्मिक परंपराओं से है, इसलिए दोनों को देवी के स्वरूपों से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है। दशमहाविद्या को हिंदू शाक्त परंपरा में देवी के दस विशिष्ट स्वरूपों के समूह के रूप में समझा जाता है।

अन्य ख़बरें

सती के अंग जहां गिरे वहां बने शक्तिपीठ, भारत की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता के भी प्रतीक

Newsdesk

दुर्गा सप्तशती के शक्तिशाली मंत्र और उनका महत्व, यहां समझें पाठ के संपूर्ण नियम और सावधानियां

Newsdesk

शारदीय नवरात्र के चौथे दिन देशभर में मां कूष्मांडा की पूजा, केंद्रीय मंत्री, सीएम योगी समेत नेताओं ने दी शुभकामनाएं

Newsdesk

Leave a Comment

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading