*हर्षित को इंसाफ दिलाएगी ई.टी.एस. जांच?*
सिवनी (म.प्र.) / बरघाट: बरघाट तहसील में राजस्व प्रशासन की घोर लापरवाही और मनमानी का एक अत्यंत चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम बरघाट निवासी आवेदक हर्षित (पिता युगलकिशोर) अपनी लगभग 7521 स्क्वायर फीट (करीब 1000 अनमोल स्क्वायर फीट) बेशकीमती जमीन के वैध और पारदर्शी सीमांकन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जिसकी कीमत करोड़ों रुपए में आंकी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की कीमत वाली इस जमीन पर आखिर किसने अवैध कब्जा कर रखा है और कौन इन दबंग भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहा है?
प्रकरण क्रमांक 1592/वसंत.तह./2026 के तहत तहसीलदार महोदय के आदेश पर पटवारी हल्का नंबर 48, खसरा नंबर 50/41/1 और 50/41/2 की भूमि के सीमांकन हेतु पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था। इस हाई-प्रोफाइल टीम में दो वरिष्ठ राजस्व निरीक्षक (आर.आई. श्याम सेठ राय एवं आर.आई. सरोज डोंगरे) और तीन पटवारी शामिल थे। लेकिन बिना किसी निशान और बिना बुनियादी आधार के किए गए इस सीमांकन से आवेदक हर्षित पूरी तरह असंतुष्ट हैं।
*अधिकारियों के अजीबोगरीब बहाने और बेशर्म तर्क*
जब निर्धारित तिथि पर टीम मौके पर पहुँची, तो अधिकारियों के कारनामे देखकर लोगों के होश उड़ गए:आर.आई. श्याम सेठ राय का बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान सामने आया कि उनकी टीम में ई.टी.एस. (Electronic Total Station) एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए वे जांच करने में असमर्थ हैं। हद तो तब हो गई जब उन्होंने लिखित में देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जनता पूछ रही है कि जब काम आता नहीं और सरकारी तनख्वाह फोकट की खानी है, तो ऐसे अधिकारी नौकरी क्यों कर रहे हैं?
दूसरी तरफ, दूसरी अधिकारी आर.आई. सरोज डोंगरे तो स्थल निरीक्षण के दौरान मौके से ही नदारद (अब्सेंट) रहीं। जब उनसे जवाब तलब किया गया, तो उन्होंने हास्यास्पद बयान दिया कि “घनी आबादी में ई.टी.एस. से सीमांकन नहीं होता और बरघाट का चांदा मुनारा ही गुम गया है!”
*आवेदक की दो टूक मांग और चेतावनी*
आवेदक हर्षित की सबसे बड़ी और स्पष्ट मांग है कि उनकी जमीन का मापन पूरी पारदर्शिता और शुद्धता के साथ आधुनिक ई.टी.एस. (Electronic Total Station) मशीन से ही किया जाए। आवेदक का साफ कहना है कि यदि ई.टी.एस. जैसी उच्च तकनीक से शुद्ध पैमानों पर माप किया जाए, तो वह शासन की माप से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे, क्योंकि घनी आबादी में भी ई.टी.एस. मशीन पूरी परिशुद्धता के साथ जमीन का सही माप दे सकती है। बार-बार गुमराह किए जाने और अधिकारियों की इस नूराकुश्ती के कारण आवेदक हर्षित का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। क्या तहसीलदार महोदय पूजा राणा इस गंभीर मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए दोषियों पर शिकंजा कसेंगी और ई.टी.एस. मशीन से शुद्ध माप करवाकर आवेदक को इंसाफ दिलाएंगी? बरघाट की जनता अब इस भ्रष्ट प्रशासनिक रवैये के खिलाफ उग्र आंदोलन की तैयारी कर रही है!


