जबलपुर। बरगी नगर संकुल केंद्र और शासकीय शालाओं में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन संपन्न हुआ। संकुल प्राचार्य किशन रायखेरे और संकुल समन्वयक विपिन विश्वकर्मा के नेतृत्व में 22 परीक्षा केंद्र बने, जहां 1600 परीक्षार्थियों ने भागीदारी की। विकासखंड समन्वयक अमृता कोरी के अनुसार समूचे विकासखंड में कुल 8000 नवसाक्षरों ने पर्चा हल किया। इस महाभियान को सफल बनाने में जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी अंजली सैलेट, जिला समन्वयक मनोज पांडे, जबलपुर ग्रामीण बीआरसीसी प्रकाश चंदेल और अफरोज खान सहित ग्रामीण जनशिक्षकों, संस्था प्रधानों एवं अक्षर साथियों का प्रमुख योगदान रहा। आयोजन का विशेष आकर्षण सास और बहू का एक साथ परीक्षा कक्ष में बैठना तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का शिक्षार्थी बनकर शामिल होना रहा, जिसने पूरे अंचल में शिक्षा का उजियारा फैलाया।
घूंघट की ओट छोड़ महिलाओं ने थामा कलम
बरगी नगर के परीक्षा केंद्रों पर ग्रामीण जीवन की नई तस्वीर सामने आई। वर्षों तक घर-परिवार और चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाओं ने मेज-कुर्सी पर बैठकर पूरे आत्मविश्वास के साथ मूल्यांकन प्रपत्र भरा। शिक्षार्थियों ने बताया कि अक्षर और अंकों का यह प्रारंभिक ज्ञान उन्हें रोजमर्रा के जीवन में आत्मनिर्भर बनाएगा। अब वे बैंकों में बिना किसी झिझक के लेनदेन कर सकेंगी, जरूरी दस्तावेजों को स्वयं समझकर दस्तखत करेंगी और किसी भी तरह के आर्थिक छल से सुरक्षित रहेंगी।
जनप्रतिनिधियों ने दिया समाज को बराबरी का संदेश
ग्राम स्तर पर जनता की अगुवाई करने वाले प्रतिनिधियों ने सामान्य नागरिकों के साथ बैठकर पर्चा दिया। उनका मानना था कि विद्या अर्जन में किसी पद या प्रतिष्ठा का बंधन आड़े नहीं आता। जब नेतृत्वकर्ता स्वयं कलम पकड़ता है, तब पूरे समुदाय में सीखने की ललक पैदा होती है। गांव के अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत शिक्षा का प्रसार ही वास्तविक सामाजिक विकास की मजबूत बुनियाद तय करता है।


