जबलपुर। जिले में अवैध शराब के निर्माण और कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों में व्यापक अभियान चलाया। अप्रैल से सितंबर 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 93,174 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया गया। विभाग ने 2,507 विभागीय और 3,128 न्यायालयीन प्रकरण दर्ज किए। विभागीय मामलों में आरोपियों पर कुल 21 लाख 5 हजार 75 रुपये की समझौता राशि और शास्ति लगाई गई। इसके बावजूद अवैध शराब के लगातार सामने आ रहे मामलों ने अभियान की प्रभावशीलता और इस कारोबार पर स्थायी रोक लगाने की चुनौती को उजागर किया है।
देशी शराब से लेकर विदेशी स्पिरिट तक बरामद
छह महीने के दौरान आबकारी अमले ने 4,656.66 लीटर देशी शराब, 5,908 लीटर हाथ भट्टी मदिरा, 420.40 बल्क लीटर विदेशी मदिरा स्पिरिट और 110.62 बल्क लीटर बीयर जब्त की। ये आंकड़े बताते हैं कि अवैध कारोबार केवल कच्ची शराब तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य श्रेणियों की मदिरा भी इसकी जद में है।
सितंबर माह में कार्रवाई और तेज रही। इस दौरान 33,790 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया गया। साथ ही 589 विभागीय और 1,133 न्यायालयीन प्रकरण दर्ज किए गए तथा 6 लाख 3 हजार 800 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया। सितंबर में 1,231.14 लीटर देशी शराब, 1,683 लीटर हाथ भट्टी मदिरा, 96.76 बल्क लीटर विदेशी स्पिरिट और 54.42 बल्क लीटर बीयर भी पकड़ी गई।
कार्रवाई के बाद भी नेटवर्क पर सवाल
अवैध शराब निर्माण की आशंका वाले ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में दबिश देकर भट्ठियों को नष्ट करने की कार्रवाई की गई। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में महुआ लाहन की बरामदगी यह सवाल खड़ा करती है कि अवैध शराब बनाने और उसकी आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है।
जानकारों के मुताबिक, केवल जब्ती, प्रकरण दर्ज करने और जुर्माना लगाने से इस कारोबार का स्थायी खात्मा मुश्किल है। इसके लिए प्रमुख सप्लायरों तक पहुंचना, अवैध आपूर्ति की कड़ियों की पहचान करना और मामलों में प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग की कार्रवाई अवैध शराब के स्रोतों को बंद करने में कितनी कारगर साबित होती है।


