ढोल-ताशा की गूंज और भजनों से झूमीं भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियांजबलपुर। भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में शरद पूर्णिमा की दूधिया चांदनी के बीच आयोजित 23वें नर्मदा महोत्सव का समापन कला, संस्कृति, भक्ति और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन इंडियन आइडल फेम अरुणिता कांजीलाल और सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा की जादुई आवाज ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक संगीत की सरिता में डूबे रहे। वहीं, महाराष्ट्र के कलाकारों की ढोल-ताशा प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया।
दूसरे दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ मां नर्मदा के पूजन के बाद त्रिभंग कला अकादमी, जबलपुर की कौतुकी उपाध्याय की कथक शैली में शिव स्तुति से हुआ। इसके बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने पारंपरिक ढोल-ताशा वादन की ऊर्जावान प्रस्तुति दी।
अरुणिता कांजीलाल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘आई गिरि नंदिनी’ स्तोत्र से की। इसके बाद ‘राम सियाराम’, ‘हीरे मोती मैं न चाहूं’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ सहित अनेक भजनों एवं गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी शास्त्रीय शैली में प्रस्तुत ठुमरी और मां नर्मदा को समर्पित गीत ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद ऋचा शर्मा ने ‘सोनिया वे रांझणा वे’, ‘जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा’ और ‘माही वे’ जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि थीं। विधायक नीरज सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विधायक सुशील तिवारी इंदू, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, जबलपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष संदीप जैन, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, उपाध्यक्ष प्रशांत केशरवानी, भेड़ाघाट नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह, उपाध्यक्ष जगदीश दाहिया, भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल, महानगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और महामंत्री पंकज दुबे सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से नर्मदा तट की सांस्कृतिक विरासत और भेड़ाघाट की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया तक पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।
राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने मां नर्मदा की महिमा और सनातन परंपराओं के सम्मान पर जोर दिया। वहीं, विधायक नीरज सिंह ने कहा कि वर्ष 2004 में शुरू हुआ नर्मदा महोत्सव आज महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। उन्होंने भेड़ाघाट में पर्यटन विकास के लिए प्रस्तावित जियोलॉजिकल पार्क और निर्माणाधीन साइंस सेंटर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
महोत्सव के समापन अवसर पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी संख्या में पहुंचे कला प्रेमियों ने भजनों, शास्त्रीय नृत्य और संगीत प्रस्तुतियों का आनंद लिया। दो दिवसीय आयोजन ने मां नर्मदा के प्रति आस्था के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।


