नई दिल्ली, 14 जुलाई ( आरएनएस) । आम आदमी पार्टी के एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा शासित एमसीडी दिल्ली की हरदयाल लाइब्रेरी में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार कर रही है। लाइब्रेरी की सेक्रेटरी पूनम पाराशर ने सभी नियमों के विरुद्ध पति को लाइब्रेरी का सदस्य बनाया और बेटे को लगभग 40 हजार की नौकरी दी। पूनम पाराशर भाजपा की पूर्व पार्षद हैं और पति अनिल झा किराड़ी के पूर्व विधायक हैं। जबकी दूसरी ओर लाइब्रेरी के कर्मचारियों को पिछले 18 महीनों से तनख्वाह नहीं मिली है। एमसीडी यहां भी फंड नहीं होने का कारण दे रही है। इसके बावजूद पूनम पाराशर ने 10 नई भर्तियां कराईं और तीन महीने के भीतर ही उन्हें पक्का भी कर दिया। स्पष्ट है कि पूरे मामले में गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि कल एलजी को सबूतों के साथ पत्र सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दूंगा। आम आदमी पार्टी ने एलजी से मामले की जांच के बाद सेक्रेटरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। और केंद्र सरकार से सभी कर्मचारियों की लंबित तनख्वाह तुरंत जारी करने की भी मांग की है। दुर्गेश पाठक ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में एक महत्तवपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में हरदयाल नाम की एक बहुत ही नामी लाइब्रेरी है। भारतीय जनता पार्टी शासित एमसीडी ने वहां के कर्मचारियों को पिछले 18 महीनों से तनख्वाह नहीं दी है। यहां भी एमसीडी फंड नहीं होने की बात कह रही है। भाजपा के नेता कह रहे थे कि अब फंड की बिल्कुल किल्लत नहीं होगी क्योंकि सारा पैसा केंद्र सरकार से आएगा। यहां सबसे पहला प्रश्न यह उठता है कि केंद्र हरदयाल लाइब्रेरी के कर्मचारियों को तनख्वाह क्यों नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने हर बार यह बताया है कि निगम कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण भाजपा का भ्रष्टाचार है। इस लाइब्रेरी को चलाने की जिम्मेदारी जिस कमेटी की होती है उसका चेयरमैन खुद एमसीडी का मेयर होता है और उसका सेक्रेटरी पार्षद होता है। चयनित सेक्रेटरी ही लाइब्रेरी की रोजमर्रा की चीजों का ध्यान रखता है। इस लाइब्रेरी की सेक्रेटरी भाजपा की पूर्व पार्षद पूनम पाराशर जी हैं। उनके पति अनिल झा किराड़ी से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा में कई पदों पर हैं। दिलचस्पी की बात यह है कि पूनम पाराशर जी ने अपने पति को लाइब्रेरी के मैनेजमेंट कमेटी का आजीवन सदस्य बना दिया। यहां तक कि अपने बेटे को भी नौकरी पर रखा जिसको 38 हजार से अधिक सैलरी मिल रही है। दुर्गेश पाठक ने कहा कि इस पूरी मामले में सबसे दिलचस्पी की बात यह है कि इनके पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने के पैसे नहीं हैं, बावजूद इसके लाइब्रेरी में 10 नई भर्तियां की गईं। भर्ती करने की प्रक्रिया हैरान कर देने वाली है। शाह टाइम्स नाम का एक अखबार आता है। 19 नवंबर 2020 को इस अखबार में नौकरी का विज्ञापन दिया गया और नौकरी के लिए आवेदन भरने की अंतिम तिथि 23 नवंबर 2020 थी। जिन 10 लोगों को नौकरी दी गई उन्हें यह कहा गया कि अभी आपको पक्का नहीं कर रहे हैं। और तीन महीनें बाद ही सभी नए कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया। इस मामले में गड़बड़ी साफ नजर आ रही है। आप लोगों को यह भी बताना चाहूंगा कि इस पूरे मामले में जो भुगत रहा है, वह हरदयाल लाइब्रेरी में अपना पूरा जीवन लगाने वाला व्यक्ति है। पूरी लाइब्रेरी का अच्छे से रखरखाव करने के बावजूद उसे 18 महीनों से तनख्वाह नहीं मिली है। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं से पूछना चाहता हूं कि क्या आपको पूनम पाराशर जी का काम उचित लग रहा है?हाल ही में एलजी साहब ने दिल्ली के लोगों को चोर और बईमान कहा। इस पूरे मामले पर एलजी साहब को पत्र लिख रहा हूं। कल सभी सबूतों के साथ उन्हें पत्र सौपूंगा। आम आदमी पार्टी चाहती है कि एलजी साहब इसपर जांच कराएं। आम आदमी पार्टी की मांग है कि केंद्र सरकार अपने वादे के अनुसार सभी कर्मचारियों की लंबित तनख्वाह तुरंत जारी करे। हमारी दूसरी मांग यह है कि पूनम पाराशर जी के कदम की जांच होनी चाहिए। उन्होंने सभी नियमों को ताक पर रखकर इस प्रकार का कदम उठाया है। आम आदमी पार्टी इस प्रकार की सभी नियुक्तियों पर जांच की मांग करती है।


