September 3, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

नेशनल हेराल्ड के सभी फैसले मोतीलाल वोरा के लेने के सबूत नहीं, ईडी के सूत्रों ने किया दावा

नई दिल्ली ,05 अगस्त (आरएनएस)।  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के करीबी सूत्रों ने कहा है कि पूछताछ के लिए बुलाए गए कांग्रेस नेताओं (सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत) में से किसी ने भी यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया कि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन स्वर्गीय मोती लाल वोरा द्वारा नियंत्रित किए गए थे।
मोती लाल वोरा कांग्रेस पार्टी के सबसे लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे। उनका साल 2020 में निधन हो गया था। दरअसल, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी से पूछताछ के दौरान कहा था कि एजेएल और यंग इंडिया लिमिटेड से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन मोती लाल वोरा ही देखा करते थे।
ईडी सूत्रों का कहना है कि जब राहुल गांधी से वित्तीय पहलुओं के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी लेनदेन वोरा द्वारा किए जाते हैं। ईडी के सामने राहुल और सोनिया के अलावा कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और पवन कुमार बंसल ने भी यही नाम लिया था लेकिन, ये सभी नेता बैठक से संबंधित दस्तावेज पेश करने में विफल रहे, अगर ऐसी कोई बैठक हुई।
सूत्रों ने यह भी कहा कि ईडी के पास खडग़े को बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था जब संसद सत्र चल रहा था क्योंकि वह यंग इंडिया के एकमात्र कर्मचारी हैं। बता दें कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दिल्ली में कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नेशनल हेराल्ड के परिसर में स्थित यंग इंडिया के कार्यालय को अस्थायी रूप से सील कर दिया है।
यंग इंडिया-एजेएल डील क्या है?
भाजपा नेता और अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में एक निचली अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण में कुछ कांग्रेस नेता धोखाधड़ी में शामिल थे।
नेशनल हेराल्ड 1938 में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित एक समाचार पत्र था। अखबार एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया गया था। 2008 में,एजेएल 90 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के साथ बंद हो गई। सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि यील ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए दुर्भावनापूर्ण तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को अधिग्रहित किया।
मोतीलाल वोरा तब एआईसीसी के कोषाध्यक्ष थे और एजेएल मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे। उन्होंने जनवरी 2008 में एजेएल समूह के नेशनल हेराल्ड अखबार को बंद करने की घोषणा करने वाले समझौते पर भी सह-हस्ताक्षर किए थे।

अन्य ख़बरें

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर टीएमसी ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से मांगा मिलने का समय

Newsdesk

यूपीएससी भर्ती 2026: साइंटिस्ट सहित 122 पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू, यहां जानें वैकेंसी से जुड़ी पूरी डिटेल

Newsdesk

मध्‍य प्रदेश: चित्रकूट में उफान पर मंदाकिनी; 1,438 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading