भोपाल,29 सितम्बर (आरएनएस)। नर्मदापुरम में रेशम उत्पादन में भ्रष्टाचार के लिए कर्मचारियों-अधिकारियेां ने फर्जी बिलों का उपयोग कर न केवल जिंदा किसानों को, बल्कि उन किसानों के नाम पर भी बड़ा भ्रष्टाचार किया है, जो मर चुके हैं।
इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा
भ्रष्ट अफसरों ने जितना ककून (जिससे रेशम निकलता है) खरीदकर बेचने और और उसके बदले किसानों को राशि का भुगतान दिखाया गया है, वह सही नहीं है। ऐसे में किसानों से ककून की खरीदी दिखाई गई है जो इस दुनिया में ही नहीं है। इसके अलावा जो किसान गांव से चले गए हैं। उससे भी फर्जी तरीके से ककून की खरीदी दिखाई गई है।
जांच में निनकलकर आई सच्चाई
किसानों ने बताया कि आयुक्त रेशम और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को की गई शिकायत के बाद कराई गई जांच में भी यह बात सामने आ चुकी है। कार्रवाई के नाम पर सिर्पु दो कम्रचारियों को निलंबित किया गया है। यहां पिछले पांच साल में करीब 350 किसानों से ककून खरीदी बताई गई है, जबकि हकीकत में करीब 70 किसानों से ही खरीदी हुई है। किसानों को कीड़े पालने के लिए घर बनाने की खारित एक लाख रुपये अनुदान राशि मिलती है। यह भी सामने आया है कि एक किसान जो पहले लाभ ले चुका था उसे दोबारा फायदा पहुंचाया गया।


