हाल ही में जबलपुर के पुलिस महकमे में नए कप्तान ने कमाल संभाल ली है, कप्तान साहब आते साथ ही काफी एक्शन मोड पर नजर आ रहे हैं। पदभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही एसपी साहब जनसुनवाई में बैठकर आमजनों की समस्याएं सुनते दिखाई दिए तो जिले में चल रहे बागेश्वर धाम के विशाल आयोजन में पहुंचकर जायजा लिया और ड्यूटी में तैनात सिपाहियों से मिलकर हौसला अफजाई किया। आते साथ ही महोदय ने जिले के तमाम अधिकारियो से मुलाकात की और जिले में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराधों में लगाम लगाने की बातें अधिकारियों और पत्रकारों से की।
जबलपुर के नवागत पुलिस अधीक्षक तुषार कान्त विद्यार्थी के लिए संस्कारधानी कोई अनजान जगह नहीं है क्योंकि दशकों पूर्व वे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में जबलपुर की आवो हवा से अच्छे से वाकिफ रह चुके हैं। हालाँकि एक दशक पूर्व जिले में अपराध और अपराधियों की गति भले ही कम रही हो लेकिन आज के समय पर पूरे जिले की कमान संभालना इतना आसान नहीं होगा। जिले में बढ़ते अपराध और बेखौफ अपराधियों के किस्से किसी से छुपे नहीं हैं, अवैध नशे के कारोबार की बात हो या जिले में फल फूल रहे जुएं सट्टे के कारोबार की बात हो ये सभी मुद्दे चुनौती पूर्ण होंगे लेकिन सवाल यह है कि नए कप्तान साहब चुनौतियों के इस मैदान में कितनी शानदार पारी खेल पाएंगे….?
बिना प्रभारी चल रहे प्रमुख थाने
जिले में बढ़ते अपराधों और अवैध कारोबारों के बढ़ने की मुख्य वजह थानों में जिम्मेदार पद का खाली होना भी देखा जा सकता है क्योंकि जिले के प्रमुख और संवेदनशील थाने ऐसे हैं जिनकी कमान उपनिरीक्षकों के हाथों में है। सूत्रों की माने तो पुलिस लाइन में बहुत से थाना प्रभारी रैंक के अधिकारी डटे हुए
हैं लेकिन बावजूद इसके भी नए थाना प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर महकमे में कोई सरगर्मी दिखाई नहीं पड़ती।हालांकि पूर्व में भी थाना प्रभारियों की नियुक्ति न होने की मुख्य वजह लाइन में पड़े थाना प्रभारियों के सेवानिवृत्ति का समय करीब होना भी रही। आगे देखना यह होगा कि नए कप्तान अपनी टीम को मजबूत करने के लिए कितने मंजे हुए सेनापतियों की नियुक्ति करते हैं या फिर आगे भी मैदान में बिना सेनापतियों के ही जंग जारी रहेगी।
खुलेआम शराबखोरी और फिर उसके बाद अपराध भी बड़ी चुनौती
खुलेआम शराबखोरी और शराब पीने के बाद बेखौफ अपराधियों का ही नतीजा यह रहा कि जबलपुर में इस साल की होली अपराध वाली रही, चार दिन में पांच हत्याओं ने प्रशासन और पुलिस के लॉ एंड आर्डर पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। हालांकि मामलों में आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए लेकिन अधिकतर घटनाएं शराबखोरी के कारण हुई थीं।


