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September 1, 2026
सी टाइम्स
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आमिर खान सचिन तेंदुलकर और उनके परिवार के लिए ‘लवयापा’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करेंगे

मुंबई, 3 फरवरी| जुनैद खान और खुशी कपूर की आगामी फिल्म **‘लवयापा’** अपनी रिलीज़ के लिए तैयार है, और इसी के तहत बॉलीवुड सुपरस्टार व जुनैद के पिता **आमिर खान** इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग क्रिकेट के दिग्गज **सचिन तेंदुलकर** और उनके परिवार के लिए आयोजित करने जा रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर और गानों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया है और यह लगातार ट्रेंड कर रही है। 

यह निश्चित रूप से एक यादगार पल होगा—आमिर खान को क्रिकेट के महानायक के साथ यह फिल्म एंजॉय करते देखना। 

फिल्म **‘लवयापा’** की पूरी कास्ट इसे देशभर में प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। टीम ने **बिग बॉस** और रियलिटी सिंगिंग शो **‘इंडियन आइडल’** में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, साथ ही **पुणे और लखनऊ** की यात्रा भी की। 

**‘लवयापा’** आधुनिक रोमांस की दुनिया में स्थापित एक दिल छू लेने वाली कहानी है, जो यादगार परफॉर्मेंस, शानदार संगीत और खूबसूरत दृश्यों से भरपूर है। यह फिल्म प्यार के हर रंग को सेलिब्रेट करती है और सभी आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आएगी। फिल्म **7 फरवरी 2025** को रिलीज़ होने वाली है। 

यह फिल्म **जुनैद खान और खुशी कपूर** दोनों के करियर की दूसरी फिल्म है। जुनैद ने नेटफ्लिक्स फिल्म **‘महाराज’** से और खुशी ने **‘द आर्चीज’** से डेब्यू किया था। 

फिल्म **‘महाराज’** प्रसिद्ध पत्रकार और समाज सुधारक **कर्सनदास मुल्जी** के जीवन पर आधारित थी। मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में पढ़े **कर्सनदास मुल्जी**, जिनका किरदार जुनैद खान ने निभाया था, मशहूर विद्वान और नेता **दादाभाई नौरोजी** के शिष्य थे। वे **गुजराती ज्ञानप्रसारक मंडली** के सदस्य थे और गुजराती समाज सुधारकों जैसे **कवि नरमद** और **शिक्षाविद महिपतराम नीलकंठ** के करीबी दोस्त भी थे। 

उन्होंने **विधवा पुनर्विवाह, महिला शिक्षा, भव्य शादियों पर होने वाले अत्यधिक खर्च, विवाहों में गाए जाने वाले अभद्र गीतों और अंतिम संस्कार की अनावश्यक रस्मों** के खिलाफ लिखा और समाज सुधार की वकालत की। उनके प्रयासों से कई सामाजिक कुरीतियां समाप्त हुईं। 

**‘सत्यप्रकाश’** में प्रकाशित उनका लेख **”हिंदूओं का असली धर्म और वर्तमान पाखंडी मत”** (21 सितंबर 1890) विवादित साबित हुआ, जिसमें उन्होंने वैष्णव आचार्यों की कुरीतियों की आलोचना की। इसी के कारण **1862 में ‘महाराज लिबेल केस’** दर्ज हुआ, जिस पर नेटफ्लिक्स की फिल्म आधारित थी। 

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