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September 12, 2026
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आसाराम बापू की अंतरिम जमानत पर 7 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

जोधपुर, 03 अप्रैल। यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को बड़ा झटका लगा। जोधपुर हाई कोर्ट में बुधवार को आसाराम बापू की अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई। हालांकि, उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं दी गई। इस मामले में अब 7 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।



इस मामले की सुनवाई जोधपुर हाई कोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आसाराम ने प्रवचन किए हैं, जो निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए शर्तों का उल्लंघन करते हैं। इस पर कोर्ट ने आसाराम के वकील से शपथ पत्र मांगा, ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

आसाराम के अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि राजस्थान हाई कोर्ट में आसाराम बापू की अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई। इससे पहले हमने गुजरात हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन दायर किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और हमें तीन महीने की अवधि विस्तार दी गई। जोधपुर हाई कोर्ट में आज जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की बेंच में यह सुनवाई हुई। कोर्ट ने शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है और अगली तारीख 7 अप्रैल तय की है।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2013 में एक 16 वर्षीय लड़की ने आसाराम पर राजस्थान के जोधपुर के पास अपने आश्रम में उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। पीड़िता के माता-पिता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके कारण 31 अगस्त, 2013 को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद, अप्रैल 2018 में, जोधपुर की एक अदालत ने आसाराम को नाबालिग के बलात्कार के लिए दोषी ठहराया, और उसे भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अक्टूबर 2013 में और आरोप सामने आए जब सूरत की एक महिला, जो कि एक पूर्व शिष्या हैं, ने आसाराम पर अहमदाबाद के मोटेरा में अपने आश्रम में 2001 से 2006 के बीच बार-बार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।

इसके बाद एक और कानूनी मामला सामने आया, जिसका समापन जनवरी 2023 में हुआ जब गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम को बलात्कार के लिए दोषी ठहराया, जो इस तरह के आरोपों पर उनकी दूसरी सजा थी। इन सजाओं के अलावा, आसाराम के बेटे नारायण साईं पर भी इसी तरह के आरोप लगे।

2013 में सूरत की दो बहनों ने आरोप लगाया कि आसाराम और नारायण ने 2000 के दशक के मध्य में उनका यौन उत्पीड़न किया था। बड़ी बहन ने आसाराम पर आरोप लगाया, जबकि छोटी बहन ने नारायण पर 2002 से 2005 के बीच सूरत आश्रम में हमले का आरोप लगाया।

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