बायो रिसोर्स सेंटरों पर निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क उपलब्धबालाघाट-11 सितंबर 2026। जिले में धान की फसल पर इन दिनों सफेद माहू, तना छेदक, तना गलन और शीथ ब्लाइट जैसी कीट-व्याधियों का प्रकोप देखा जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के मैदानी अमले ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने तथा प्रारंभिक अवस्था में ही कीटों की रोकथाम के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग की टीमों द्वारा किए जा रहे खेतों के निरीक्षण में पाया गया है कि रोपाई के करीब 25 से 30 दिन बाद धान के तनों पर सफेद माहू का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके कारण धान की पत्तियां सुनहरी-पीली पड़ने लगती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
रासायनिक दवाओं के विकल्प के रूप में जैविक उपाय
कृषि विभाग ने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के साथ-साथ प्राकृतिक एवं जैविक उपायों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। धान में कीट प्रकोप की प्राथमिक रोकथाम के लिए प्राकृतिक तरीके से तैयार निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क उपयोगी बताए गए हैं। इनके उपयोग से फसल की सुरक्षा के साथ मित्र कीटों और मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
कृषि विभाग एवं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में संचालित बायो रिसोर्स सेंटरों (बीआरसी) पर ये जैविक कीटरोधी उत्पाद उचित दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन गांवों के बीआरसी में उपलब्ध हैं जैविक कीटनाशक
कटंगी तहसील के घुनाड़ी, टेकाड़ी एवं सिताखोह; बालाघाट तहसील के मगरदर्रा, खुरसोड़ी, अमोली, कोहकाडीबर, नवेगांव, समनापुर, कटंगी, आंवलाझरी, बघोली एवं पाथरवाड़ा; किरनापुर के जानवा, बेलगांव एवं अकोला; लालबर्रा के मुरझड़, बांदरी एवं मोहगांव तथा लांजी तहसील के बाघाटोला, मनेरी, भूरसाडोंगरी, सर्रा, नेवरवाही, बेलगांव एवं देवरबेली के बायो रिसोर्स सेंटरों में निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क उपलब्ध हैं।
इसी तरह बिरसा तहसील के जानपुर, निक्कुम एवं कटंगी; बैहर के बिरवा, कुगांव, दलदला एवं करवाही; वारासिवनी के थानेगांव, टुईयापार, दिनी एवं केरा; खैरलांजी के पुलपुट्टा, चोरपिण्डकेपार एवं आरंभा तथा परसवाड़ा तहसील के चंदना (कनई), खरपड़िया एवं डोंगरिया स्थित बीआरसी में भी ये जैविक उत्पाद किसानों के लिए उपलब्ध हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप की नियमित निगरानी करते हुए प्रारंभिक स्तर पर जैविक कीटरोधी दवाओं का उपयोग करें। गंभीर प्रकोप की स्थिति में कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार ही रासायनिक कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग किया जाए। छिड़काव के दौरान पर्याप्त जल स्तर और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करने की भी सलाह दी गई है।


