दीपावली का शुभ अवसर है, और इस पावन मौके पर शहर के प्रथम नागरिक, महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नु’ जी का ऊर्जावान आह्वान शहर के नागरिकों में नई चेतना जगाने वाला है। ‘सी टाइम्स’ के ‘दृष्टिकोण’ कार्यक्रम में, उन्होंने केवल शुभकामनाएँ ही नहीं दीं, बल्कि एक सशक्त संकल्प भी मांगा है— शहर को स्वच्छता और स्वदेशी के प्रकाश से जगमग करने का संकल्प।
महापौर ‘अन्नु’ के नेतृत्व में शहर ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं। शहर महानगर बन चुका है, और ‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ में देश भर में पाँचवें स्थान पर होना एक बड़ी उपलब्धि है। उनका लक्ष्य स्पष्ट है: इस दीपावली पर हर नागरिक के सहयोग से इस स्थान को ‘नंबर एक’ पर लाना है। इससे भी बड़ी उपलब्धि माँ नर्मदा की शुद्धि का संकल्प है, जिसके तहत एसटीपी प्लांट लगाकर गंदे नालों को रोका गया है, जिससे नर्मदा का जल अब ‘ए प्लस’ गुणवत्ता का है। वायु गुणवत्ता में देश में दूसरा स्थान हासिल करना इस प्रगति का एक और प्रमाण है।
महापौर ‘अन्नु’ का गवर्नेंस का दृष्टिकोण व्यापक है। वे मानते हैं कि नगर निगम का काम सिर्फ अधिनियमों तक सीमित नहीं है। अतिक्रमण हो, खराब सिग्नल हो, या यातायात की अव्यवस्था— हर चुनौती को स्वीकार करना और नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही उनका धर्म है। ‘सब हमारे काम हैं,’ यह कहने वाले नेता का यह भाव शहर को सम्पूर्ण विकास की ओर ले जाने का हौसला रखता है।
इस दीपावली पर महापौर ने तीन महत्वपूर्ण ‘संकल्प’ लेने का आग्रह किया है। पहला, शहर की स्वच्छता और स्वच्छ वायु के लिए एक अतिरिक्त दिया जलाया जाए। यह दीप शहर को नंबर एक बनाने के ‘प्यास’ का प्रतीक होना चाहिए। दूसरा, उन सफाई कर्मचारियों को आशीर्वाद और सम्मान दें, जो हमारी सफाई व्यवस्था की रीढ़ हैं। तीसरा, ‘वोकल फॉर लोकल’ की प्रधानमंत्री की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए स्वदेशी वस्तुओं और विशेषकर मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि स्थानीय कारीगरों का रोजगार बढ़े।
यह दीपावली तभी सच्ची होगी जब हम सिर्फ अपने परिवार के साथ ही नहीं, बल्कि ‘अंतिम छोर के व्यक्ति’ के साथ भी खुशियाँ बाँटेंगे। महापौर का यह आह्वान स्पष्ट करता है कि शहर की सुंदरता और समृद्धि केवल प्रशासनिक प्रयासों से नहीं, बल्कि हर नागरिक के ‘संकल्प’ और ‘त्याग’ से संभव है। शहर को ‘नंबर एक’ बनाने की यह ‘प्यास’ ही उसे बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगी।


