काश एक ऐसा शब्द है जिसमें आस की आत्मा छिपी होती है। जब भी हम काश बोलते हैं तो हमारे मन के किसी कोने में आशा का दीप झिलमिला उठता है।
तो फिर क्यों ना हम इस दीप को जलने दें और जीवन-पथ को प्रदीप्त कर लें।
माना कि जीवन सरल नहीं होता झंझावातों की आँधियों में बिखरने को आतुर हो जाता है बस यहीं से हमारी परीक्षा का प्रारम्भ होता है। यही समय होता है जब ईश्वर देखता है कि हम कैसे इन आँधियों में से स्वयं के व्यक्तित्व को बचाकर निकाल पाते हैं। यदि इस परीक्षा में हम खरे उतरते हैं तो भगवान हमारी मदद के माध्यम तैयार कर देता है और हम अनवरत जीवन-पथ पर चलते जाते हैं।
साहस का दामन थामे रहना होगा ताकि हम इन तूफ़ानों में भी अडिग रहें और यदि ऐसा हुआ तो हम कितना सुंदर जीवन जी लेंगे हमारी कल्पना से भी परे है।
लेखक – सपना ‘क्षिती’


