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September 15, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

बालाघाट नामकरण वर्षगांठ-130 वाँ पुरातत्व संग्रहालय में उत्साह पूर्वक मनाया गया

बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय में दिनांक 31 दिसम्बर 2025 को दोपहर 3 बजे से सायंकाल 5 बजे तक बालाघाट नामकरण वर्षगांठ-130 वाँ उत्साह पूर्वक राजेन्द्र सिंह ठाकुर समाज सेवी के मुख्य आतिथ्य, डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार की अध्यक्षता, प्रो.एम.एन.बापट, डाॅ.कुलदीप बिल्थरे, डाॅ.रामकुमार रामरिया, डाॅ.सतीश चिले, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हे, राजेन्द्र कुमार शुक्ला, अशोक सागर मिश्रा, डाॅ.कविता गहरवार, सुश्री नलिनी शुक्ला, डाॅ.आशा गोहे, प्रो.पाशू गौतम, साहेब लाल दशहरे, दिनेश कुमार नेमा, सतीश भारद्वाज, गजानंद सिंह नगपुरे के विशिष्ट आतिथ्य में मनाया गया। विचार संगोष्ठी की श्रंखला में डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में बालाघाट नामकरण वर्षगांठ-130 पर विस्‍तार पूर्वक बताते हुए कहा कि पूर्व में बुढ़ा और बुढ़ी के नाम से जाना जाता था, 1895 में तात्कालिक अंग्रेज सरकार ने बारहघाट की श्रृंखला में बारहघाट लिखकर भेजा था, जहाँ से संशोधित होकर बालाघाट नामांकित हुआ। अंग्रेज सरकार ने बालाघाट 6 पुरातात्विक महत्व के स्थलों को संरक्षित किया था, जो वर्तमान में केन्द्र सरकार के आधिपत्य में है। राज्य सरकार ने मात्र दो ही स्थलों को संरक्षित किया, 1988 को हट्टा बावली तथा 2019 में धनसुआ के गोंसाई मंदिर। शेष असंरक्षित स्थल है, जिसे संरक्षित करने की आवश्‍यकता प्रतीत होती है। बालाघाट नामकरण किसी भी राज्य और जिले में नहीं मनाया जाता, देश और मध्यप्रदेश का एक मात्र जिला बालाघाट है, जिसका नामकरण वर्षगांठ इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में मनाया जाता है। बालाघाट नामकरण वर्षगांठ को सप्ताह 15/12/25 से 30/12/25 तक मनाया गया था। आज 31 दिसम्बर 25 को समापन हुआ है। इसी तरह पुरातत्व संग्रहालय परिसर में स्थापित विश्व में नैरोगेज डीजल इंजन-बोगी के कारण जाना जाता है। इसी परिदृश्य में डाॅ.सतीश चिले ने बालाघाट जिले की भौगोलिक क्षेत्र, इतिहास और अपने अनुभव को विस्तारित किया।
इसी क्रम में राजेन्द्र सिंह ठाकुर,
डॉ.कुलदीप बिल्थरे ने भी अपने विचारों से अवगत कराया।
तदोपरान्त कवि गोष्ठी प्रारंभ जिसमें कवियों ने 2025 की बिदाई और 2026 के आगमन पर उच्च स्तरीय रचनाऐं सुनाकर रसास्वादन करवाया। निलेश बोपचे,
कृष्णा कुमारी कंसरे,संध्या मेश्राम, ममता भलावी सहित शासकीय कमला नेहरु महिला महाविद्यालय बालाघाट, जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालाघाट की छात्र/छात्राऐं उपस्थित थी। जिन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर किरनापुर की माँ किरनाई देवी,मंदिर की दुर्लभ फोटो सुश्री नलिनी शुक्ला ने संग्रहालय में लगाने के लिए भेंट की।
की छात्राऐं आदि उपस्थित थे।

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