बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट परिसर में डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष की अध्यक्षता में दिनांक 10 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से साप्ताहिक समीक्षात्मक बैठक आयोजित हुई। सम्पूर्ण शेष कार्यो को संग्रहाध्यक्ष के माध्यम से सम्पन्न कराया जा जायें। आगामी बैठक 19 जनवरी 2026 को आयोजित की गई है।
समीक्षात्मक बैठक उपरान्त विश्व हिन्दी दिवस पर संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने कहा कि विश्व हिन्दी दिवस का महान पर्व देश में वर्ष 2006 से निरन्तर आयोजित किया जा रहा है। लेकिन हिन्दी शिक्षा का महत्व गिरते जाने से युवा पीढ़ी हिन्दी के शब्दों को भूलते जा रहे है।
भारत को स्वतन्त्र हुए 79 वर्ष हो गये। भारत शनै:-शनै: बाईस वीं सदी की अग्रसर हो रहा है। आज भी भारत को हिन्दुस्तान, इंडिया कहा जाता है। दिल्ली में इंडिया गेट के नाम से प्रसिद्ध है, जबकि *भारत द्वार* कहना चाहिए। दूसरी ओर यहाँ भी ध्यानाकर्षण होना चाहिए अंग्रेजी शब्दों को वृहद रुप में प्रस्तुत किया जा रहा है-कमिश्नर, कलेक्टर, पोस्ट आफिस, इंजीनियर, डाक्टर, फॉरेस्ट आफिस, पार्लियामेंट मेंबर, प्रेसीडेंट पी.डब्ल्यू.डी.आफिस, हास्पिटल, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, पिक्चर, डेम, विलायत, पापा-मम्मी, डैडी, अंकल-आंटी, मिसेस, हस्बेंड, सारी आदि? अच्छा हुआ हिन्दी के कुछ शब्द बच गये, नहीं तो वह भी अंग्रेजी में परिवर्तित हो जातें। वर्तमान परिदृश्य में अंग्रेजी अंको और शब्दों इतने तेजी से फैल चुका है। जितना आंधी-तूफान भी नहीं फैलता होगा। दोषी अंग्रेज नहीं? दोषी हम है? जो गुण गान करने में अपने को सर्वश्रेष्ठ समझता है। अगर देश का नाम भारत करना है, तो नवजात शिशु को जन्म से ही अपनी मात्र भाषा हिन्दी के बारे में बताना पड़ेगा, लेकिन यहाँ भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा अगर महिला अंग्रेजी शिक्षित रही तो नवजात शिशु गर्भ में ही प्रशिक्षित हो धरती पर आयेगा। समस्त पूर्व नामांकित नामों को हिन्दी में परिवर्तित करना नितांत आवश्यक प्रतीत होता। हिन्दी में ही हस्ताक्षर होना चाहिए। तब जाकर सोने की चिढ़िया कहलायेगा!
उक्त अवसर पर डाॅ.कुलदीप बिल्थरे, डॉ.सुभाष चंद्र गुप्ता, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हें, तनुजा रामावत, आराधना केन्डारकर, मानसी चौरीवार, दीपिका धुर्वे, छाया खण्डाते, दीप सिखा, आयुशी रहांगडाले शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालाघाट, शासकीय कमला नेहरु महाविद्यालय बालाघाट की छात्र/छात्राऐं सहितअन्य ने भी विश्व हिन्दी दिवस की महिमा का बखान किया। हिन्दी को विस्तारित करने की बात कहीं। इस अवसर पर अनेक लोग मौजूद थे।


