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May 28, 2026
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मर्दानी से थप्पड़ तक: 2014 के बाद बदली हीरोइन की परिभाषा, बॉलीवुड ने महिलाओं की आवाज को बनाया ताकत

मुंबई, 22 जनवरी  भारत में बेटियों के प्रति सामाजिक सोच बदलने और उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को गुरुवार को 11 साल पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को शुरू किए गए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान और उसके साथ जुड़ी ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ ने देश के हर कोने में बालिकाओं के सशक्तीकरण की नई इबारत लिखी है। भाजपा की सरकार आने के बाद न केवल महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं लाई गईं, बल्कि बॉलीवुड ने भी महिला केंद्रित कहानियों के जरिए समाज को प्रेरित करने का काम किया। 2014 के बाद रिलीज हुई कई फिल्मों ने यह संदेश दिया कि महिलाएं न सिर्फ अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती हैं, बल्कि अपने निर्णयों से समाज में बदलाव भी ला सकती हैं।

मर्दानी: रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’ फ्रैंचाइजी लोगों की पसंदीदा है। अब इस फ्रैंचाइजी का तीसरा पार्ट जल्द ही आने वाला है। इसमें रानी ने शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाया। 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘मर्दानी’ में शिवानी एक निडर पुलिस अधिकारी हैं, जो महिला उत्पीड़न और अपराध के खिलाफ लड़ती हैं। गोपी पुथरान के निर्देशन में बनी यह क्राइम थ्रिलर फिल्म पुरुष प्रधान मानसिकता के खिलाफ लड़ती है। रानी मुखर्जी ने अपने किरदार में भाव, चाल और फेमिनिस्ट रवैये के साथ पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाया, जबकि विशाल जेठवा ने विलन के रूप में सस्पेंस और डर का असर बढ़ाया। हिचकी: 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिचकी’ में रानी मुखर्जी ने एक अलग ही भूमिका निभाई। फिल्म में वह टीचर नैना माथुर के किरदार में टॉरेट सिंड्रोम जैसी चुनौती का सामना करती हैं। 18 स्कूलों से रिजेक्ट होने के बावजूद नैना अपने सपनों को पूरा करने और बच्चों को पढ़ाने के अपने जुनून में लगी रहती हैं। सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा के निर्देशन में बनी यह कॉमेडी ड्रामा समाज में उन बीमारियों और मानसिक चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाती है, जिन्हें अक्सर हल्के में लिया जाता है। रानी का किरदार बताता है कि आत्मविश्वास और धैर्य से हर महिला अपने सपनों को सच कर सकती है। डियर जिंदगी: 2016 में रिलीज हुई फिल्म में आलिया भट्ट और शाहरुख खान ने ऐसी कहानी प्रस्तुत की, जो मानसिक स्वास्थ्य और खुद को समझने के महत्व पर आधारित है। आलिया का किरदार कायरा अपनी जिंदगी की उलझनों और डर से जूझती है और मनोचिकित्सक शाहरुख खान उसे खुद को समझने और खुश रहने का तरीका सिखाते हैं। गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी यह फिल्म महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के संदेश को बखूबी पेश करती है। राजी: फिल्म राजी में आलिया भट्ट ने सहमत का किरदार निभाया, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय देश की खातिर पाकिस्तान में जासूस बन जाती है। 2018 में रिलीज हुई फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया। यह थ्रिलर न केवल देशभक्ति की कहानी बताती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि महिलाएं अपने साहस और बुद्धिमानी से किसी भी मुश्किल परिस्थिति में सफल हो सकती हैं।

विक्की कौशल, जयदीप अहलावत और संजय सूरी ने भी अपने-अपने किरदारों के जरिए फिल्म को सशक्त बनाया। थप्पड़: अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘थप्पड़’ ने घरेलू हिंसा और पारिवारिक दबाव की उन कहानियों को पर्दे पर उतारा, जिनमें अक्सर महिलाएं अपने हक के लिए खड़ी नहीं हो पातीं। 2020 में रिलीज हुई फिल्म में तापसी पन्नू ने अमृता के किरदार में एक सामान्य गृहिणी के रूप में दिखाया कि कैसे एक छोटे से थप्पड़ ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसने अपने हक के लिए आवाज उठाई। फिल्म में कई औरतों के जीवन की कहानियों को दिखाया गया, जिसके जरिए समझाया गया कि हर महिला अपने अधिकार के प्रति संवेदनशील होती है। द केरल स्टोरी: निर्देशक सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म की कहानी फातिमा उर्फ शालिनी (अदा शर्मा) के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो अपनी सहेलियों गीतांजलि (सिद्धि इदनानी), निमाह (योगिता बिहानी) और आसिफा (सोनिया बलानी) के साथ नर्सिंग स्कूल में एडमिशन लेती है, लेकिन इस दौरान वे कट्टरपंथी संगठनों के जाल में फंस जाती हैं। शालिनी को पहले पाकिस्तान और फिर सीरिया ले जाया जाता है। अदा शर्मा का किरदार डर, पीड़ा और बेचैनी के बावजूद अपनी पहचान और स्वतंत्रता की लड़ाई को मजबूती से दिखाता है। —

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