June 24, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर के बेटे पर नौकरानी से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने गिरफ्तार किया



लाहौर, 26 जनवरी  पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस ने एक पूर्व क्रिकेटर के बेटे को अपनी नौकरानी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी हुई है।

बारकी पुलिस स्टेशन ने पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर के बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज की। यह शिकायत क्रिकेटर के घर काम करने वाली महिला ने 23 जनवरी को दर्ज कराई। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर में कहा गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित महिला को फोन करके तुरंत घर आने के लिए कहा।

महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसे हाउसिंग सोसाइटी के गेट से कार में बैठाकर अपने फार्महाउस ले गया। वहां पर आरोपी ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद महिला ने बारकी पुलिस स्टेशन में मामले की रिपोर्ट की और रेप का केस दर्ज कराया।

पुलिस ने आरोपी को कस्टडी में लेकर जांच शुरू कर दी है। नाम न बताने की शर्त पर, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया है कि आरोपी और शिकायत करने वाली महिला की मेडिकल जांच की जा रही है। आरोपी एक पूर्व फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर का बेटा है।

जेंडर-बेस्ड हिंसा पर नजर रखने वाली संस्था साहिल के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में, पाकिस्तान में 2025 के शुरुआती 11 महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में इजाफा हुआ है।

रिपोर्ट में चारों प्रांतों, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के 81 नेशनल अखबारों में छपे डेटा को इकट्ठा किया गया है। पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान में 6,543 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 5,253 मामले रिपोर्ट हुए थे, जो एक साल में लगभग 25 फीसदी की बढ़ोतरी है।

जनवरी-नवंबर 2025 के बीच रिपोर्ट की गई घटनाओं में हत्या के 1,414 मामले, अपहरण के 1,144 मामले, मारपीट के 1,060 मामले, आत्महत्या के 649 मामले और बलात्कार के 585 मामले शामिल हैं। रिपोर्ट से पता चला कि 32 फीसदी रेप केस में अपराधी पीड़िता के परिचित थे, जबकि 17 फीसदी मामलों में अजनबी शामिल थे।

12 फीसदी मामलों में पीड़ित के पति शामिल थे, जबकि 21 फीसदी मामलों में अपराधियों की पहचान नहीं बताई गई। ज्यादातर लिंग आधारित हिंसा पीड़ितों के घरों में हुई, जो रिकॉर्ड किए गए मामलों का 60 फीसदी था, जबकि 13 फीसदी मामले अपराधियों के घर पर हुए।

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