जबलपुर। हिंदी लेखिका संघ भोपाल का 31वां वार्षिक उत्सव एवं कृति अलंकरण सम्मान समारोह विगत दिवस पंडित रविशंकर सभागृह, हिंदी भवन में गरिमा और भव्यता के साथ आयोजित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस साहित्यिक आयोजन में देश के विभिन्न शहरों से आईं लगभग तीस महिला रचनाकारों को साहित्य की विविध विधाओं—कहानी, कविता, उपन्यास, आलोचना, संस्मरण एवं शोध—में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
विशेष उल्लेखनीय रहा कि जबलपुर से सर्वाधिक रचनाकार सम्मानित हुईं, जिससे संस्कारधानी का साहित्यिक गौरव और बढ़ा। इस अवसर पर डॉ. अनामिका तिवारी, डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव, श्रीमती मीना भट्ट, श्रीमती अर्चना मलैया, श्रीमती कृष्णा राजपूत एवं श्रीमती प्रतिमा अखिलेश को कृति अलंकरण से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की प्रांतीय मंत्री डॉ. करुणा सक्सेना (ग्वालियर) ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर रहे, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. संतोष चौबे, कुलाधिपति रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, उपस्थित रहे। समारोह में कैलाश चंद्र पंत (पद्मश्री) की विशेष उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
संघ की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी लेखन में महिला रचनाकारों की भूमिका निरंतर सशक्त हो रही है और यह मंच उनकी सृजनशीलता को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम बन रहा है।
इस अवसर पर हिंदी लेखिका संघ जबलपुर की अध्यक्ष डॉ. कामना कौस्तुभ तथा कोषाध्यक्ष सीमा बादल स्वामी सहित अन्य पदाधिकारियों की भी विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाज में महिला लेखन की भूमिका पर सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ तथा रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


