हिंदी एवं भाषा विज्ञानविभाग में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम
जबलपुर। हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग में आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के परम आदरणीय कुलगुरु प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा जी मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभागाध्यक्ष प्रो धीरेन्द्र पाठक जी ने सभी का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन करते हुए मातृभाषा की प्रासंगिकता का रेखांकन किया। कुलगुरु जी ने कहा कि मातृभाषा हमारी संस्कृति और संस्कारों की संवाहक होती है । हम कितनी ही भाषाएं सीख लें पर हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। लोग जहां अंग्रेजी सीखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं वहीं मातृभाषा को बोलने में झिझकते हैं। एक समय ऐसा भी रहा कि लोग मातृभाषा प्रयोग के लिए संघर्षरत हुए जिसके परिणामस्वरूप युनेस्को के सन् 1999 की अनुशंसा को संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2002 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। जिन शहीदों की याद में यह घोषणा हुई उन्हें भी इस कार्यक्रम में याद किया गया। इस कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी अपनी मातृभाषा में कार्यक्रम की प्रस्तुति दी संस्कृत विभाग की शोध छात्र शिल्पा कोरी ने संस्कृत भाषा में गीत प्रस्तुत किया, नेपाली भाषा में ममता थापा ने एक गीत प्रस्तुत किया। बघेली भाषा में नीलम गौतम ने कविता प्रस्तुत की, हर्ष विश्वकर्मा ने जापानी भाषा में एक कविता प्रस्तुत किया। बंगाली भाषा में राजलक्ष्मी ने कविता प्रस्तुत की । इसी तरह सौरभ शर्मा ने अंग्रेजी भाषा को प्रयोग किस तरह हमारे संविधान में शामिल किया गया इस पर अपनी बात रखा। अंत में कार्यक्रम का आभार डॉ तरुण घोष ने बंगाली भाषा में किया कार्यक्रम का संचालन हिंदी में डॉक्टर आशा रानी ने किया इस अवसर पर डॉ ए के गिल, डॉ रणबीर कौर कलसी, डॉ. विवेक गहरवार, डॉ. सरिता यादव, संदीप उपाध्याय और बहुत संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


