Lजबलपुर। संस्कारधानी की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से समरसता सेवा संगठन द्वारा इस वर्ष भी “संस्कारधानी समरसता होली महोत्सव” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सर्व जाति समभाव, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के संदेश के साथ आयोजित यह महोत्सव शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रंगपंचमी पर निकलेगी भव्य समरंग शोभायात्रा
आयोजन समिति के अनुसार, रविवार, 08 मार्च 2026 (रंगपंचमी) को दोपहर 2:30 बजे पूज्य संतों के सानिध्य में भव्य “समरंग शोभायात्रा” निकाली जाएगी। यह यात्रा छोटा फुहारा स्थित कलेही माता मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों—मिलौनीगंज चौक, कोतवाली, सराफा, कमानिया, फुहारा, लार्डगंज, गंजीपुरा, सुपर बाजार और मालवीय चौक—से होते हुए डी.एन. जैन मैदान में संपन्न होगी।
यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा मंच स्थापित कर शोभायात्रा का स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर फूलों की होली खेली जाएगी, जिससे वातावरण पूर्णतः रंगमय और उत्सवी बनेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी विशेष प्रस्तुति
शोभायात्रा के समापन स्थल डी.एन. जैन मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसमें पारंपरिक फाग, लोकगीत, नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। आयोजकों के अनुसार, देश की विविध संस्कृतियों के अनुरूप पारंपरिक व्यंजनों की भी व्यवस्था रहेगी, ताकि सहभागी अलग-अलग प्रदेशों के स्वाद और परंपराओं का अनुभव कर सकें।
आयोजन में बच्चों एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उद्देश्य है कि सभी समाजों की परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक झलकियां एक ही मंच पर देखने को मिलें और सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश जाए।
1 मार्च को सर्व समाज बैठक
कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए रविवार, 01 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजे अग्रवाल बारात घर, शीतलपुरी, बल्देवबाग में सर्व समाज की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा की जाएगी।
आयोजन समिति अध्यक्ष संदीप जैन ने शहर के सभी सामाजिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे बैठक में शामिल होकर अपने सुझाव दें और आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में सहयोग करें।
एकता और समभाव का संदेश
समरसता सेवा संगठन का कहना है कि यह महोत्सव केवल होली उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। आयोजकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे परिवार और मित्रों सहित बड़ी संख्या में शामिल होकर संस्कारधानी की सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊंचाई दें।


