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May 29, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

नदियों की निर्मलता के लिए पूर्व की सरकार की तुलना में सीएम योगी ने किया 10 गुना काम



लखनऊ, 22 मार्च । उत्तर प्रदेश में नदियों की निर्मलता और गंदे पानी के शोधन के काम में योगी सरकार ने नौ वर्षों में रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के तहत सिर्फ 5 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इंस्टॉल हो पाए थे, वहीं 2017 के बाद पिछले 9 साल में ऐसे 50 से अधिक एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, यानी इस अवधि में क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है।

प्रदेश में लगभग 160 एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मिलियन लीटर (एमएलडी) वेस्ट वाटर को शुद्ध कर नदियों में जाने से रोका जा रहा है। पूर्व की सरकारों की तुलना में मौजूदा योगी सरकार में सीवर शोधन ढांचे के विस्तार की रफ्तार लगभग दस गुना तक बढ़ी है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संरचना तैयार की जा रही है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के अंतर्गत केवल 5 एसटीपी इंस्टॉल हो सके थे, वहीं योगी सरकार में 50 से अधिक नए एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं।

राजधानी लखनऊ में इस समय कुल 09 सीवेज शोधन संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल शोधन क्षमता 624.50 एमएलडी है। इन संयंत्रों के जरिए गोमती एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले पानी को पहले ही शुद्ध किया जा रहा है।

संचालित एसटीपी भरवारा, दौलतगंज (शहरी), दौलतगंज (ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी आदि स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों से निकला ट्रीटेड वॉटर एक ओर नदियों को स्वच्छ रखने में मदद कर रहा है, वहीं चरणबद्ध तरीके से इसके पुन: उपयोग (रीयूज) की योजना भी तैयार की जा रही है।

लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा कुल 03 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं।

इसके अलावा लखनऊ में 4 नए एसटीपी बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी। इन संयंत्रों के तैयार हो जाने के बाद राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है।

2017 से पहले नदियों की निर्मलता की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और एसटीपी निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त थी। वहीं, योगी सरकार में नए प्लांटों के साथ-साथ पुराने संयंत्रों के उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

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