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Jabalpur
April 27, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

बच्चों को राहत : नर्सरी से 5वीं तक के स्कूल 30 अप्रैल तक बंद



जबलपुर। जिले में लगातार बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तेज धूप और लू के हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिले के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक की कक्षाओं को 30 अप्रैल 2026 तक बंद कर दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, जिससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गर्मी में बच्चों को डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।
इससे पहले प्रशासन ने 18 अप्रैल को स्कूलों के समय में बदलाव करते हुए सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब अवकाश घोषित करना आवश्यक हो गया।
मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत, यदि तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है तो जिला कलेक्टर को प्राथमिक कक्षाओं को बंद करने का अधिकार होता है। वर्तमान में मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रशासन सतर्क हो गया है।
हालांकि, विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन सभी शिक्षक और विद्यालय स्टाफ नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करेंगे। इस दौरान परीक्षाओं की तैयारी, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य आवश्यक कार्य पूरे किए जाएंगे।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं और हल्के व सूती कपड़े पहनाएं। साथ ही दोपहर के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि लू से बचाव के लिए छांव में रहें, सिर ढककर बाहर निकलें और अधिक गर्मी के समय घर के अंदर ही रहें। यदि किसी को चक्कर, उल्टी या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
कुल मिलाकर, प्रशासन का यह फैसला बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।

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