April 24, 2026
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समर्पण की मिसाल – डॉ. वी.के. रैना ने देहदान कर चिकित्सा शिक्षा को दिया अमूल्य योगदान


जबलपुर। जीवनभर बीमार और जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.के. रैना ने मृत्यु के बाद भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देहदान कर एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने पहले ही लिखित अनुमति देकर स्पष्ट कर दिया था कि उनका पार्थिव शरीर मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन और अनुसंधान के लिए उपयोग किया जाए, ताकि भविष्य में मरीजों को इसका लाभ मिल सके।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई

डॉ. रैना की अंतिम इच्छा के अनुरूप कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और परिजनों की उपस्थिति में उनका देहदान एनाटॉमी विभाग को किया गया। इस दौरान उन्हें राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उपस्थित चिकित्सकों, स्टाफ और अन्य लोगों ने उनकी पार्थिव देह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


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सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की जीती-जागती मिसाल

नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मयंक प्यासी ने डॉ. रैना को याद करते हुए कहा कि वे सादगी और जिम्मेदारी की मिसाल थे। उन्होंने एक प्रेरक घटना साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2007 में वे अक्सर सुबह नेहरू नगर पार्क के पास उन्हें खुद झाड़ू लगाकर कचरा साफ करते देखते थे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा—
“यह सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है। मैं पहले एक भारतीय नागरिक हूं, फिर डॉक्टर। उनकी यह सोच समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है।

चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मिला संबल

डॉ. रैना का देहदान मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा। उनके इस निर्णय से न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में बेहतर उपचार और अनुसंधान के नए रास्ते भी खुलेंगे।


देहदान को बढ़ावा देने की पहल

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा देहदान और अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए मरणोपरांत गार्ड ऑफ ऑनर देने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस निर्णय का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए देह की उपलब्धता बढ़ाना और समाज में जागरूकता फैलाना है।

समाज को मिला प्रेरणादायक संदेश

डॉ. रैना का जीवन और उनका अंतिम निर्णय समाज के लिए एक गहरा संदेश छोड़ गया है—सेवा केवल जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के लिए योगदान दिया जा सकता है। उनका यह कदम आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाता रहेगा।

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