विभागीय समन्वय और जागरूकता’ से रुकेगी होम डिलीवरी
डिंडौरी सी टाइम्स । आकांक्षी विकासखंड बजाग में बढ़ रहे घरेलू प्रसव (होम डिलीवरी) की रोकथाम और संस्थागत प्रसव के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए ’केयर कैंपेनिंग प्रोग्राम’ के तहत एक सघन जमीनी अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों और अधिकारियों की टीम ने ग्राम पंचायत पिपरिया के दूरस्थ वनांचल ग्रामोंकृ जलदा, खरारीटोला और सिंदूरखार के विभिन्न टोलों का भ्रमण कर मूल समस्याओं की नब्ज टटोली।
अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
आमतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच न होने का कारण खराब रास्तों या नेटवर्क को माना जाता है। लेकिन, जमीनी पड़ताल में स्थिति भिन्न पाई गईः
सुविधाओं की उपलब्धताः’ गांवों में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह पर्याप्त है और वाहनों के पहुंचने के लिए भी सुगम मार्ग उपलब्ध हैं।
जागरूकता और शिक्षा का अभावः’ बैगा आदिवासी महिला हितग्राहियों से चर्चा करने पर यह तथ्य सामने आया कि उन्हें शासन की योजनाओं की सतही जानकारी है और कुछ लाभ भी मिल रहा है। हालांकि, शिक्षा की कमी और पूर्ण जागरूकता के अभाव में वे संस्थागत प्रसव के महत्व को नहीं समझ पा रही हैं।
कम उम्र में गर्भवती होना शिक्षा के अभाव में बैगा जनजातियों में चोरी-छिपे विवाह और कम उम्र में गर्भधारण की समस्या देखने को भी मिली। समाधान हेतु किशोरी चौपाल, निरंतर बालिका शिक्षा और समाज के मुखियाओं की काउंसलिंग की योजना बनाई गई।
नवाचार और समाधान
टीम ने आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत सचिव, गर्भवती महिलाओं और विशेष रूप से परिवार के मुखियाओं (पुरुषों) से विस्तृत संवाद किया। इस मंथन से यह अभिनव निष्कर्ष (नवाचार) निकला कि मातृ स्वास्थ्य केवल महिलाओं का विषय नहीं है। यदि ’विभिन्न सरकारी विभागों के आपसी समन्वय’ से ग्राम पंचायत स्तर पर एक साझा मंच तैयार किया जाए, जहां ’महिला और पुरुष दोनों को एक साथ एकत्रित कर’ शासकीय योजनाओं और सुरक्षित प्रसव की जानकारी दी जाए, तो होम डिलीवरी के आंकड़ों में भारी कमी लाई जा सकती है।
इस महत्वपूर्ण भ्रमण और समाधान शिविर में योसेड हेल्थ फाउंडेशन के राज्य समन्वयक अनंत राव पवार, नीति आयोग (एबीएफ) से डॉ. विकास जैन, बीपीएम लल्ला यादव, क्षेत्रीय सीएचओ, आशा कार्यकर्ता और पंचायत सचिव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन अब इस ’समन्वित जन-जागरूकता मॉडल’ को जल्द ही धरातल पर उतारने की तैयारी कर रहा है।
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