May 6, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका की रक्षा बहस पर हावी है चीन का खतरा

वॉशिंगटन, 1 मई । चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और रूस, ईरान व उत्तर कोरिया के साथ उसकी बढ़ती नजदीकी अमेरिका की रक्षा खर्च पर हुई एक अहम सीनेट सुनवाई में मुख्य मुद्दे के रूप में उभरी। इसका भारत की रणनीतिक गणनाओं पर भी असर पड़ सकता है। सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष रोजर विकर ने चेतावनी दी कि अमेरिका “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे खतरनाक सुरक्षा माहौल” में है और इसके लिए बीजिंग के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदार ठहराया। विकर ने कहा, “हम शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ प्रतिस्पर्धा में बंधे हुए हैं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मुकाबला तय करेगा कि 21वीं सदी “अमेरिका के नेतृत्व में” रहेगी या “सत्तावादी और निरंकुश व्यवस्थाओं” द्वारा आकार दी जाएगी। उन्होंने चीन को रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ “आक्रामकों के एक धुरी” का हिस्सा बताया और कहा कि ये देश अमेरिका और उसके लोकतांत्रिक सहयोगियों के हितों का विरोध करने के लक्ष्य से एकजुट हैं। युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बजट “कई मोर्चों पर जटिल खतरे के माहौल” से निपटने के लिए तैयार किया गया है, जिसका केंद्र चीन है।

हेगसेथ ने कहा, “हम एक ऐसी सेना का पुनर्निर्माण कर रहे हैं… जो हमारे दुश्मनों में लगातार भय पैदा करे।” उन्होंने ड्रोन, मिसाइल रक्षा और उन्नत तकनीकों में निवेश पर जोर दिया, ताकि समान क्षमता वाले प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला किया जा सके। जॉइंट चीफ्स के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि बीजिंग अपनी सेना में आक्रामक तरीके से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शामिल कर रहा है। केन ने कहा कि वे अपने युद्ध संचालन के सभी पहलुओं में एआई को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसका उपयोग कमांड, खुफिया और युद्ध अभियानों में किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसमें किसी भी तरह की कमी “हमें जोखिम में डाल सकती है।” कानून निर्माताओं ने चेतावनी दी कि चीन वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सैन्य अभियानों पर करीबी नजर रख रहा है।

केन ने ईरान समेत अन्य अमेरिकी अभियानों का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि चीन में मेरा समकक्ष बहुत ध्यान से देख रहा है।” सीनेटरों और पेंटागन नेतृत्व ने आपूर्ति श्रृंखला और महत्वपूर्ण सामग्री व तकनीकों के लिए चीन पर निर्भरता को लेकर चिंता जताई। हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि “हमारी आपूर्ति श्रृंखला के किसी भी महत्वपूर्ण हिस्से के लिए चीन पर निर्भर नहीं होना चाहिए।” भारत के लिए ये घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीन को मुख्य दीर्घकालिक खतरे के रूप में देखने की वाशिंगटन की नीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक तालमेल को और मजबूत करती है।

अन्य ख़बरें

रोमानिया की संसद ने प्रधानमंत्री इली की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया

Newsdesk

पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं: ब्लू स्टार के सीएमडी

Newsdesk

फ्रांस में अगले महीने होगी भारत की डीप टेक प्रदर्शनी, पीएम मोदी होंगे शामिल: धर्मेंद्र प्रधान

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading